बिजनौर। बिजनौर-बैराज रोड पर एनएच-119 के लिए जमीन का अधिग्रहण किया गया। इसमें कुछ जमीन बिजनौर के प्रापर्टी डीलरों की भी गई। जब मुआवजा मांगा गया तो इसकी जांच हुई और पूरी ही जमीन सरकारी निकली।
जांच और आगे बढ़ी तो यह रकबा 800 बीघा तक पहुंच गया, जो पुराने रिकॉर्ड में रेतभूमि दर्ज है। ऐसे में जहां प्रापर्टी डीलरों के 150 करोड़ रुपये से ज्यादा इस जमीन में फंस गए हैं, वहीं इस पूरे गाटा की जमीन को सरकारी घोषित करने की तैयारी हो चुकी है।
अभी तक बिजनौर-बैराज रोड पर मेरठ-पौड़ी हाईवे का काम शुरू नहीं हुआ था। इस कारण यहां पर जमीन अधिग्रहण का काम भी देरी से हुआ। हाईवे के लिए जमीन अधिग्रहण किया गया तो जिन किसानों की जमीन इसमें गई, उन्होंने मुआवजा मांगा। इसमें कुछ बिजनौर के प्रापर्टी डीलर भी हैं। जिन्होंने हाईवे की संभावना के चलते पहले ही लाभ कमाने के लिए जमीन खरीद ली थी।
अब बात मुआवजे की आई तो जांच में पता चला कि जो जमीन हाईवे के लिए अधिग्रहण की गई है, वह पुराने रिकॉर्ड में सरकारी संपत्ति है। उसकी श्रेणी रेत-रेगिस्तान है। जिसका न तो पट्टा किया जा सकता है और न ही उसकी श्रेणी बदली जा सकती है। इसकी और विस्तार से जांच हुई तो पूरा मामला खुल गया। पुराने लेखपालों की मिलीभगत से रिकॉर्ड में गड़बड़ी कर जमीन के पट्टे कर दिए गए थे। इसके बाद इसकी श्रेणी बदल दी गई और जिससे यह जमीन कई बार बेची गई।