फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नहीं रहे वॉलीबाल खिलाड़ी सैय्यद अहमद

विज्ञापन
सैय्यद अहमद। (फाइल फोटो) - फोटो : BIJNOR
विज्ञापन
नहीं रहे वॉलीबाल खिलाड़ी सैय्यद अहमद
विज्ञापन

बिजनौर। बिजनौर के काजीपाड़ा निवासी वॉलीबाल खिलाड़ी सैय्यद अहमद का मंगलवार को निधन हो गया। उनको लोग प्यार से उस्ताद नाम से पुकारते थे। शायर के तौर पर उन्हें असर अयूबी के नाम से भी जाना जाता था। उस्ताद ने प्रदेश, राष्ट्रीय स्तर पर कई वॉलीबाल टूर्नामेंट में भाग लिया।
सैय्यद अहमद ने साल 1931 में बिजनौर डिपो पर परिचालक के तौर पर नौकरी शुरू की थी। उन्होंने काशीपुर, रुद्रपुर, बरेली, सीतापुर, धामपुर, नहटौर, नगीना और नजीबाबाद डिपो पर नौकरी की। नजीबाबाद डिपो से 1994 में स्टेशन अधीक्षक के पद से सेवानिवृत्त हुए। उस्ताद के बेटे अरशद यजदानी बताते हैं कि उन्हें वॉलीबाल से इतना लगाव था कि सेवानिवृत्त होने के बाद बच्चों को 2003 तक नेहरू स्टेडियम में प्रशिक्षण देने जाते थे। अगर कहीं वॉलीबाल टूर्नामेंट का पता चल जाता था तो वे तुरंत खेलने के लिए वहां पहुंच जाते थे। उन्हें शायरी का भी बहुत शौक था। उस्ताद नेहरू स्टेडियम टीम में चयनित होकर वॉलीबाल खेलने लखनऊ, कानपुर, शाहजहांपुर, बरेली सहित कई जगहों पर टूर्नामेंट खेलने जाते थे। सैय्यद अहमद ने 13 साल की उम्र से ही वॉलीबाल खेलना शुरू कर दिया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

अरशद यजदानी बताते हैं कि उनका जन्म नहटौर में हुआ था। इसके बाद दादा झालू में आकर रहने लगे थे। होने के बाद सैय्यद अहमद ने बिजनौर के काजीपाड़ा में घर बनाया। वॉलीबाल के साथ-साथ उन्हें शायरी और किताब लिखने का भी शौक था। अपने अंतिम दिनों में भी वे किताब पर कुछ न कुछ लिखते रहते थे। 2015 में लखनऊ की उर्दू एकेडमी से सैय्यद अहमद की किताब अहसास के शोले प्रकाशित हुई। रमजान के अंतिम पांच दिन वह दुनिया की सलामती के लिए रात मस्जिद में बीताते और दुआ करते थे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें