मुखर मंत्र से टूटेगा तनाव का तिलिस्म
बिजनौर। डिग्री कॉलेजों में पढ़ने वाली छात्राओं को मुखर करने के लिए अभियान की शुरूआत की गई है। शासन के सौ दिन के कार्यक्रम में चुप्पी तोड़ो, खुलकर बोलो अभियान शामिल है। डिग्री कॉलेजों में छात्राओं के मनोभावों को जानने के कार्यक्रम होंगे। कॉलेजों में हेल्थ क्लब खुलेंगे। शिक्षाविदों ने इसे छात्राओं की मानसिक मजबूती के लिए अच्छा फैसला बताया है।
डिग्री कॉलेजों में शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों से छात्राएं पढ़ने आती हैं। छात्राओं का पारिवारिक, सामाजिक तथा आर्थिक परिवेश भिन्न-भिन्न होता है। अनेक छात्राएं निजी कारणों से मनोवैज्ञानिक दबाव में रहती हैं। परिजनों से अपनी पढ़ाई एवं भविष्य की योजनाओं के साथ कॅरिअर के बारे में स्पष्ट राय नहीं दे पाती हैं। शासन ने छात्राओं के मन की बात जानने के लिए चुप्पी तोड़ो, खुलकर बोलो अभियान 100 दिन की योजना में शामिल किया है। योजना के अंतर्गत कॉलेजों की शिक्षिकाओं समेत महिला मनोवैज्ञानिक छात्राओं से पारिवारिक माहौल में संवाद करेंगी। अंतर्मन के उद्गार जानकर परिस्थितियों के अनुरूप परामर्श देंगी। जिससे छात्राओं का भविष्य संवर सके।
ये हैं 10 प्रमुख कार्यक्रम
1- डिग्री कॉलेजों में परामर्श सत्र होंगे।
2- काउंसलिंग सेशन का आयोजन होगा।
3- महिला प्राध्यापक काउंसिल प्रभारी होंगी।
4- प्रभारी समस्याओं को सुनकर परामर्श देंगी।
5- काउंसलिंग में एनजीओ का सहयोग लिया जाएगा।
6- काउंसलिंग में मनोचिकित्सकों को आमंत्रित किया जाएगा।
7- गर्ल्स डिग्री कॉलेजों में हेल्थ क्लब तथा कोएड कॉलेजों में बालिका हेल्थ क्लब बनेंगे।
8- काउंसलिंग सेशनों की समीक्षा होगी।
9- छात्राओं से नियमित रखा जाएगा।
10- काउंसलिंग प्रभारी सहयोगी महिला प्राध्यापकों से सुझाव लेंगी।
छात्राओं के हित में फैसला : डॉ. पुष्पा जोशी
विवेक कॉलेज ऑफ लॉ बिजनौर की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पुष्पा जोशी के अनुसार यह कार्यक्रम छात्राओं के हित में लिया गया अच्छा निर्णय है। कहा कि छात्राएं बहुत सी समस्याओं को अपने माता-पिता से नहीं कह पाती हैं। शिक्षक छात्राओं के लिए माता, पिता, बहन सभी भूमिका में होता है। इसलिए छात्राएं शिक्षक से खुलकर बात कर लेती हैं। छात्राओं को अभियान से सकारात्मक ऊर्जा मिलेगी।
मनोचिकित्सकों को बुलाया जाना सही : डॉ. शोभिता
डॉ. शोभिता अग्रवाल का कहना है कि काउंसलिंग में शिक्षकों के साथ मनोचिकित्सकों को बुलाया जाना सही है। इससे छात्राओं को परिस्थितियों के अनुसार सही मशविरा मिलेगा। छात्राओं के लाइफ स्टाइल में बदलाव आएगा।