बिजनौर जिले में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण सूची का प्रकाशन आज होगा। चुनाव में कुल करीब आठ हजार पंचायत व वार्ड अलग-अलग श्रेणी में आरक्षित होंगे। परिसीमन के कारण क्षेत्र पंचायत वार्ड के आरक्षण से दावेदारों को झटका लग सकता है। प्रधान पद के दावेदार भी आरक्षण प्रकाशन के इंतजार में हैं।
जिले में 1123 ग्राम पंचायत हैं। शासन के तय नियमों के अनुसार त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की आरक्षण प्रक्रिया 20 फरवरी से चल रही है। चुनावों में प्रधान पद के लिए पंचायतों का आरक्षण होना है। जबकि जिला पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य व ग्राम पंचायत सदस्य के लिए वार्ड का आरक्षण होना है। आरक्षण चार श्रेणी में हो रहा है। चुनाव के लिए अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग और महिला की सीट संख्या तय होनी है। नियमानुसार एसटी के लिए दो प्रतिशत, एससी के लिए 21 प्रतिशत व ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण कोटा निर्धारित है।
डीपीआरओ दफ्तर के अनुसार प्रधान पद के लिए विभिन्न श्रेणी में 744 पंचायत आरक्षित होनी हैं। ग्राम पंचायत सदस्य के 7035, क्षेत्र पंचायत सदस्य के 690 तथा जिला पंचायत सदस्य के 41 वार्ड आरक्षित होने हैं। प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य के आरक्षण का प्रकाशन ब्लॉक पर है। जिला पंचायत सदस्य का आरक्षण जिला पंचायत दफ्तर में होगा।
बीडीसी आरक्षण पर पड़ सकता है असर
मौहम्मदपुर देवमल व हल्दौर ब्लॉक की 12 पंचायत बिजनौर पालिका में शामिल हो गई हैं। मौहम्मदपुर देवमल ब्लॉक की छह और हल्दौर ब्लॉक की एक पंचायत आंशिक रूप से शामिल है। परिसीमन के बाद सात पंचायतों के बीडीसी वार्ड में मतदाता उधर से उधर हुए हैं। मतदाताओं की अदला बदली आरक्षण को प्रभावित कर सकती है। ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में बीडीसी मतदान करते हैं। प्रमुख पद के दावेदार आरक्षण के अनुसार अपनी बिसात बिछा रहे हैं। जिले में प्रधान पद के आरक्षण में बड़ा उलटफेर हो सकता है। इस बार आरक्षण चक्रानुक्रम में है। प्रधान के लिए जो पंचायत वर्ष 1995 से लेकर 2015 तक आरक्षित नहीं हुई हैं। उन्हें पहले नियमानुसार आरक्षित किया जाएगा। इससे मठाधीश दावेदारों की नींद उड़ी है।
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पंचायतों में प्रधान ही एक छत्र मालिक माना जाता है। ग्राम पंचायत सदस्य चुनकर तो आते हैं परंतु आरोप है कि उन्हें बैठकों में बुलाया तक नहीं जाता है। विकास कार्यों के क्रियान्वयन में उनकी सलाह तक नहीं ली जाती है। बदलते राजनीतिक परिवेश में ग्राम पंचायत सदस्य अपनी भूमिका पहचान रहे हैं। इसलिए पंचायत सदस्य के दावेदार भी आरक्षण पर निगाह रखे हुए हैं।
शासन का आरक्षण के लिए शेड्यूल तय है। दो मार्च व तीन मार्च को आरक्षण सूची का प्रकाशन है। इसके बाद चार मार्च से आठ मार्च तक आपत्ति ली जाएंगी। आपत्ति ब्लॉक में दी जा सकती हैं। नौ मार्च को आपत्ति डीपीआरओ दफ्तर में इकट्ठा होंगी। फिर डीएम की अध्यक्षता में बनी जिला स्तरीय समिति आपत्तियों का निस्तारण करेगी
- सतीश कुमार, डीपीआरओ।
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