उधर, बिजनौर के चक्कर रोड निवासी अनिल कुमार की पुत्री आकांक्षा राजकीय इंटर कॉलेज में इंटर की छात्रा है। उसे एक दिन के लिए जिले के पुलिस अधीक्षक का चार्ज सौंपा गया। एसपी डॉ. धर्मवीर सिंह के साथ आकांक्षा एसपी कार्यालय पहुंचीं। एसपी की कुर्सी पर बैठकर आकांक्षा ने कई शिकायतें सुनीं। महादेवपुरम में रहने वाली ज्याति ने पति के उसे पीटने की शिकायत की। एक पुलिस कर्मी ने 45 दिन की छुट्टी के लिए प्रार्थना पत्र दिया। आकांक्षा ने गणतंत्र दिवस पर छुट्टी देने से मना कर दिया। इसके बाद आकांक्षा ने पुलिस कार्यालय का निरीक्षण किया। बाद में एसपी ने आकांक्षा को ट्रॉफी देकर उसके घर पहुंचवाया।
डीएम-एसपी बनना चाहती हैं उपासना और आकांक्षा
डीएम बनी उपासना सिंह आईएएस तो आकांक्षा आईपीएस अधिकारी बनाना चाहती हैं। दोनों डीएम व एसपी की भूमिका निभा कर बेहद खुश हैं। उपासना के पिता फेरी लगाते हैं तो आकांक्षा के पिता मजदूरी करते हैं। दोनों का कहना है कि डीएम व एसपी की कुर्सी पर बैठकर उन्हें इस जिम्मेदारी का पता चला।
सीडीओ बनीं कशिश गुप्ता
कशिश गुप्ता प्रतीक मुख्य विकास अधिकारी बनीं। सीडीओ केपी सिंह ने कशिश को चार्ज सौंपने की प्रक्रिया पूरी की। कशिश ने स्टेनो अरविंद कुमार से मजदूरों को रोजगार देने की स्थिति देखी। इससे जुड़ी प्रगति की फाइल देखी। जनसाधारण की लंबित शिकायतों के बारे में पूछा। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम के बारे में बताया गया। इस समस्त प्रक्रिया में सीडीओ केपी सिंह ने मदद की। एक दिन की सीडीओ ने मतदान करने की शपथ दिलाई। समय सीमा पूरा होने पर सभी का आभार जताया। बाद में कशिश ने कहा कि वह मध्यम वर्गीय परिवार से है। सीडीओ बनने का अनुभव उनके जीवन को नई दिशा देगा। सीडीओ केपी सिंह की विनम्रता को वह कभी नहीं भूलेगी।
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