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UP Elections 2022: बिजनौर की सभी सीटों पर उलझे समीकरण, मुस्लिमों ने गठबंधन को दी मजबूती, दलितों ने बिगाड़ा गणित, पढ़िए खास रिपोर्ट

Tue, 15 Feb 2022 05:23 PM IST
Dimple Sirohi रजनीश त्यागी, अमर उजाला नेटवर्क, बिजनौर

सार

बिजनौर जिले में आमतौर पर पिछले चुनावों में सुबह से ही मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र के बूथों पर लंबी कतारें लग जाती थीं, लेकिन इस बार इसका उल्टा नजर आया। अधिकांश जगहों पर भाजपा और सपा-रालोद गठबंधन के बीच टक्कर होने के अनुमान लगाए जा रहे हैं।
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UP election 2022 - voting in Bijnor - फोटो : अमर उजाला
बिजनौर जिले की आठों विधानसभा सीटों पर मतदान हो चुका है। जिले के 89 प्रत्याशियों का परिणाम ईवीएम में कैद हो गया है। कौन जीतेगा-कौन हारेगा, दस मार्च को मतगणना के साथ इसका फैसला भी हो जाएगा। मतदाताओं के रुझान की बात करें, तो गठबंधन और भाजपा के बीच अधिकांश सीटों पर टक्कर नजर आ रही है।

सुबह सात बजे से ही मतदान शुरू हो चुका था। आमतौर पर पिछले चुनावों में सुबह से ही मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र के बूथों पर लंबी कतारें लग जाती थीं, लेकिन इस बार इसका उल्टा नजर आया। अधिकांश जगहों पर हिंदू बाहुल्य क्षेत्रों के बूथों पर लंबी लाइनें थीं, जबकि मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में सुबह नौ बजे के बाद लाइन लगनी शुरू हुईं।

एक बात लंबे समय से कही जा रही थी कि मुस्लिम मतदाता गठबंधन के अलावा बसपा पर भी बड़ी संख्या में जाएगा, लेकिन मतदान के दिन ऐसा होता कम ही दिखा। आठों की विधानसभा सीटों पर मुस्लिम मतदाता बड़ी संख्या में सपा-रालोद गठबंधन की ओर जाते दिखे। इसमें से एक छोटा हिस्सा बसपा के पास भी रहा। दोपहर हुई तो जाट वोट भी बिखरते नजर आए।
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election news - फोटो : अमर उजाला
बिजनौर, चांदपुर और नजीबाबाद विधानसभा सीटों पर जाटों का प्रभाव माना जाता है। अधिकांश वोट भले ही सपा-रालोद गठबंधन पर गए, लेकिन शाम होते-होते एक बड़ा हिस्सा भाजपा को भी मिलता दिखा।

नहटौर के साथ-साथ अन्य सीटों पर भी दलितों के एक बडे़ हिस्से का रुझान भाजपा की ओर आता नजर आया। नूरपुर सीट पर सैनी मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा गठबंधन की ओर जाता दिखा। ऐसे में अनुमान से अलग होने वाले मतदाताओं के इस बंटवारे ने कई सीटों के समीकरण उलझा दिए हैं। हालांकि अधिकांश जगहों पर भाजपा और सपा-रालोद गठबंधन के बीच टक्कर होने के अनुमान लगाए जा रहे हैं।
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UP election 2022 - voting in Bijnor - फोटो : अमर उजाला
धामपुर विधानसभा : त्रिकोणीय माना जा रहा मुकाबला 
धामपुर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के अशोक राणा, बसपा मूलचंद चौहान और सपा के नईम उल हसन के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है। धामपुर विधानसभा क्षेत्र में करीब तीन लाख तीन हजार वोट हैं, इनमें से करीब 67 हजार मतदाता चौहान बिरादरी, 50 हजार दलित, एक लाख 24 हजार मुस्लिम मतदाता व बाकी अन्य बिरादरी के मतदाता शामिल हैं। युवा शिक्षित वर्ग ने रोजगार को विकल्प के रूप में चुन कर वोटिंग करने की बात कही है।

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UP election 2022 - voting in Bijnor - फोटो : अमर उजाला
अफवाह फैलाकर अधिकारियों को दौड़ाया
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि किसी ने मैसेज कर दिया कि केएम इंटर कॉलेज के बूथों पर कुछ मतदाताओं को रोका जा रहा है। सीओ अजय कुमार अग्रवाल पुलिसबल के साथ संबंधित बूथों पर पहुंचे और जानकारी की। सूचना झूठ निकली। इस मौके पर पुलिसबल से वहां पर मौजूद भीड़ को नगीना चौक तक दौड़ाया।

यह भी पढ़ें: यूपी चुनाव 2022: हर घंटे बदल रहा हार जीत का आंकड़ा, मेरठ की सात सीटों पर बेहद करीबी और दिलचस्प होगा मुकाबला
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UP election 2022 - voting in Bijnor - फोटो : अमर उजाला
नगीना विधानसभा सीट : गठबंधन और भाजपा के बीच टक्कर
चुनाव प्रचार के दौरान ही नगीना विधानसभा सीट पर मुख्य मुकाबला सपा-रालोद गठबंधन और भाजपा प्रत्याशी के बीच माना जा रहा था। लेकिन आशंका व्यक्त की जा रही थी कि बसपा प्रत्याशी इंजीनियर बृजपाल सिंह और कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में उतरीं कांग्रेेस नेता ओमवती की पुत्रवधू हैनरीता चुनावी समीकरणों को बिगाड़ सकती हैं, लेकिन मतदान के दिन भी मुख्य मुकाबला सपा विधायक व पार्टी प्रत्याशी मनोज पारस और भाजपा प्रत्याशी डॉ. यशवंत सिंह के बीच ही नजर आया।
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UP election 2022 - voting in Bijnor - फोटो : अमर उजाला
मतदान कर लौटे लोगों की अगर मानें तो बसपा प्रत्याशी के परंपरागत वोट में सेंध लगाने में सपा व भाजपा प्रत्याशी कुछ हद तक कामयाब हो गए। जबकि बसपा प्रत्याशी सपा के परंपरागत वोट में कुछ खास सेंध नहीं लगा पाए।
 
वहीं, दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी का परंपरागत वोट बंटता हुआ दिखाई नहीं दिया। एक तरफ जहां नगीना में साइकिल की रफ्तार तेज दिखाई दी। पतंग कोई खास उड़ान नहीं भर पाई, जिससे सपा समर्थक खुश नजर आए। सपा के परंपरागत वोट का काफी हद तक एक मुश्त उनके पक्ष में जाना सपा समर्थकों के लिए शुभ संकेत माना जा रहा है। 
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UP election 2022 - voting in Bijnor - फोटो : अमर उजाला
दूसरी तरफ भाजपा का भी परंपरागत वोट एकमुश्त भाजपा के साथ चट्टान की तरह खड़ा दिखाई दिया। भाजपा प्रत्याशी ने रालोद के परंपरागत वोट में भी काफी हद तक सेंध लगाई, लेकिन सपा के परंपरागत वोट का खास बंटवारा न होना भाजपा की चिंता जरूर बढ़ा रहा है। अंबेडकर समाज पार्टी के समर्थक समाजवादी पार्टी और बसपा के परंपरागत वोट में काफी मात्रा में सेंध लगाने का दावा कर रहे हैं। नगीना सीट पर मौजूदा विधायक मनोज पारस जीत की हैट्रिक लगाएंगे या भाजपा अपने 23 साल के सूखे को समाप्त कर देगी यह अब 10 मार्च को ही पता चल पाएगा।

सभी प्रत्याशी कर रहे जीत के दावे
बारह दिन के प्रचार के बाद सोमवार को नगीना विधानसभा की जनता ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। सभी प्रत्याशियों का परिणाम ईवीएम में कैद हो गया। मतदान समाप्त होने के बाद सभी प्रत्याशियों के समर्थक अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। नगीना सीट पर वैसे तो विभिन्न प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों को मिलाकर 12 प्रत्याशी चुनावी मैदान में थे। 
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