वहीं नगीना सीट पर भी सपा के टिकट पर मनोज पारस लगातार तीसरी बार विधायक चुने गए हैं। साल 2012 और 2017 में भी सपा के टिकट पर मनोज पारस ने जीत दर्ज कराई थी। अबकी बार भी मनोज पारस ने 27 हजार से ज्यादा मतों से भाजपा के डॉ. यशवंत सिंह को पटकनी दी है। वहीं विधायक ओमकुमार भी तीसरी बार विधायक चुने गए हैं।
साल 2012 में बसपा के टिकट पर ओमकुमार विधायक बने थे, साल 2017 में भाजपा के टिकट पर दूसरी बार विधायक चुने गए और अब फिर से तीसरी बार चुनाव जीते हैं। तीनों ही विधायक जिले में ऐसे विधायक है जोकि हैट्रिक लगाने में कामयाब रहे।
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तीन दशक से नजीबाबाद में नहीं खिला कमल
विधानसभा क्षेत्र नजीबाबाद में करीब तीन दशक से भाजपा को जीत नहीं मिली है। विधानसभा क्षेत्र नजीबाबाद से वर्ष 1991 में भाजपा से राजेंद्र सिंह चुनाव जीते थे। मध्यवर्ती चुनाव में वर्ष 1993 में माकपा के मास्टर रामस्वरूप सिंह जनता दल गठबंधन से चुनाव जीते थे। मास्टर रामस्वरूप सिंह लगातार तीन बार विधायक रहे। वर्ष 1996 में माकपा के रामस्वरूप सिंह सपा गठबंधन से चुनाव जीते थे। वर्ष 2002 में भी सपा गठबंधन में माकपा के रामस्वरूप सिंह को तीसरी बार चुनाव जीतने का मौका मिला था।
विधानसभा वर्ष 2007 के चुनाव में बसपा के शीशराम सिंह, वर्ष 2012 में बसपा से ही हाजी तसलीम अहमद ने चुनाव जीता था। वर्ष 2017 में सपा सिंबल पर हाजी तसलीम अहमद दूसरी बार विधानसभा चुनाव जीते थे। समाजवादी पार्टी ने एक बार फिर तसलीम अहमद पर विश्वास रखते हुए उन्हें टिकट दिया। रालोद गठबंधन के साथ तसलीम अहमद ने अब तक की 23803 मतों से सबसे बड़ी जीत हासिल की है।