बिजनौर। यूपी बोर्ड परीक्षा का इंटर का रिजल्ट अभी घोषित नहीं हुआ है। रिजल्ट में देरी से विभिन्न प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में लगे छात्रों की बेचैनी बढ़ रही है। छात्रों को रिजल्ट की देरी से मनमाफिक कोर्स में दाखिले से वंचित रह जाने की चिंता है।
जिले में 44 हजार से अधिक छात्र छात्राएं इंटर में पंजीकृत हैं। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटर की परीक्षा कोरोना प्रकोप के कारण निरस्त हो गई है। बोर्ड ने छात्रों को अंक आवंटन का फार्मूला तय किया है। बोर्ड फार्मूला के आधार पर रिजल्ट तैयार करने में लगा है। रिजल्ट जुलाई के प्रथम व द्वितीय सप्ताह में घोषित करने का एलान किया गया था लेकिन अभी तक रिजल्ट नहीं आने से इंटर के छात्र छात्राएं परेशान हैं। असल में इंटर के बाद छात्र मेडिकल व इंजीनियरिंग समेत अन्य तकनीकी कोर्सेज में दाखिले लेते हैं। कुछ कोर्स में कंपटीशन तथा कुछ में मैरिट से प्रवेश मिलता है। कुमारी मंजुलिका तथा हर्ष का कहना है कि वे कक्षा 11 से ही तैयारी में लगे हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तारीखों की घोषणा होने लगी है। अब यदि रिजल्ट समय से नहीं आया तो मनमाफिक कोर्स में एडमिशन नहीं मिल सकेगा।
अभिलेखों में गड़बड़ी से रिजल्ट में हो रही देरी
डीआईओएस दफ्तर से मिली जानकारी के अनुसार बोर्ड रिजल्ट घोषित करने से पहले इंटर के छात्रों के अभिलेखों का हाईस्कूल के अभिलेखों से मिलान कर रहा है। अभिलेखों में मिसमैच की बड़े पैमाने पर गलती आ रही है। जिले में करीब दो दर्जन कालेज की गलती पकड़ी गई है। छात्रों के मोबाइल नंबर गलत है। डीआईओएस राजेश कुमार ने बताया कि विद्यालयों ने गलती सुधार दी है। एक सप्ताह से कोई नया मामला नहीं आया है। बताया जाता है कि अभिलेखों में गलती ही रिजल्ट में देरी की वजह है।