यूपी बोर्ड : नहीं आ रहा रिजल्ट, मिल रही तारीख
बिजनौर। यूपी बोर्ड हाईस्कूल और इंटरमीडिएट का रिजल्ट घोषित नहीं हो रहा है। विद्यार्थियों को केवल तारीख ही मिल रही है। अब फिर से रिजल्ट की अगली तारीख आते ही छात्रों की नंबरों को लेकर धड़कन तेज हो गई है। इस बार रिजल्ट विद्यालय आधारित आना है। इसलिए माना जा रहा है की परीक्षा में खूब नंबर आएंगे और मेरिट भी ऊंची होगी। ऐसे में छात्रों को डिग्री कॉलेजों में दाखिले के लिए खूब मशक्कत करनी पड़ेगी।
हाईस्कूल और इंटरमीडिएट का वर्ष 2021 का रिजल्ट बिना परीक्षा के आएगा। रिजल्ट शत-प्रतिशत रहना पहले से ही तय है। हाईस्कूल का रिजल्ट छात्रों के कक्षा नौ की परीक्षा और कक्षा दस की प्री-बोर्ड परीक्षा में प्राप्त अंकों के फार्मूले पर और इंटरमीडिएट का रिजल्ट हाईस्कूल, कक्षा 11 में मिले अंक और कक्षा 12 की प्री-बोर्ड परीक्षा के प्राप्त अंकों के फार्मूले पर तैयार हो रहा है। जिले में हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा में 90 हजार से अधिक छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। सबसे पहले रिजल्ट जुलाई के प्रथम सप्ताह, फिर दूसरे सप्ताह में आने की जानकारी मिली थी। विभागीय जानकारी के अनुसार अब तीसरे सप्ताह में रिजल्ट आ सकता है। छात्रों को पता है कि पास तो है ही परंतु नंबरों को लेकर धड़कन बढ़ जाती है। रिजल्ट घोषित होने की रोज नई तारीख आ जाती है, परंतु रिजल्ट नहीं आ रहा है। छात्र रिजल्ट घोषित नहीं होने से परेशान हैं। इंटरमीडिएट के छात्रों में सबसे अधिक बेचैनी है।
हर्ष और अनामिका का कहना है कि अन्य राज्यों के बोर्ड लगातार रिजल्ट घोषित कर रहे हैं। छात्र अच्छे विश्वविद्यालयों में दाखिलों की कोशिशों में लगे गए हैं। परंतु यूपी बोर्ड के रिजल्ट का अभी पता नहीं है। रिजल्ट में देरी गैर राज्यों के डिग्री कॉलेजों के दाखिलों में परेशानी पैदा कर सकती है। सूबे के अच्छे डिग्री कॉलेजों में सीट कम हैं। इसलिए दाखिले को मारामारी रहेगी।
अभिभावक क्या कहते हैं
अभिभावक कहते हैं कि कोरोना ने अच्छे छात्रों के रास्ते में रोड़े लगा दिए हैं। बलराम सिंह, सत्यवीर सिंह, परमजीत सिंह का तर्क है कि छात्रों का रिजल्ट कॉलेजों के हाथ में पहुंच गया है। अच्छे छात्र लोकल व प्री-बोर्ड परीक्षा के मुकाबले बोर्ड की परीक्षा अधिक गंभीरता से देते हैं। अगली कक्षाओं में दाखिले के लिए मेरिट बोर्ड परीक्षा में मिले अंकों के आधार पर बनती है। कहा कि स्कूलों के हालात किसी से छिपे नहीं हैं। स्कूलों में अपने पराये का खेल खूब चलता है। ऐसे में मेरिट हाई होगी, अच्छे छात्रों को मेरिट में पिछड़ने का डर है।
नंबर कम आने पर विकल्प मौजूद
डीआईओएस दफ्तर के अनुसार विद्यालयों से कक्षा नौ, कक्षा 10 प्री-बोर्ड, कक्षा 11 व कक्षा 12 प्री-बोर्ड के अंक पहले ही बोर्ड की वेबसाइट पर अपलोड करा लिए गए थे। डीआईओएस राजेश कुमार ने बताया कि यदि छात्र अपने रिजल्ट से संतुष्ट नहीं हैं तो उसके पास परीक्षा देने का विकल्प रहेगा। परीक्षा की तारीख बाद में घोषित होगी। छात्र से कोई परीक्षा फीस भी नहीं ली जाएंगी। शासन के लिए छात्रों का हित पहले है।