बिजनौर। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर एक राम अवतार यादव ने सुनीम हत्याकांड में दोषी पाते हुए इकरार एवं मकसूद आलम को आजीवन कारावास एवं 30 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
शासकीय अधिवक्ता जितेंद्र पाल सिंह राजपूत के अनुसार थाना शिवाला कलां के गांव तबीबपुर धुंधली के जाबीर अहमद ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसकाभाई सुनीम अहमद (35) दूध का काम करता था। वह 12 मार्च 2014 को सुबह रोजाना की तरह पांच बजे दूध लेने पड़ोस के गांव शादीपुर मिल्क गया था। रास्ते में उसके भाई की धारदार हथियारों व गोली मारकर अज्ञात व्यक्तियों द्वारा हत्या कर दी गई।
22 मार्च को उसने आईजी बरेली को प्रार्थना पत्र दिया कि उसके भाई के कत्ल से पूर्व उत्तर प्रदेश पुलिस में कार्यरत मकसूद से सुनीम के बड़े भाई के लड़के हारुन की क्रिकेट मैच के ऊपर कहासुनी हो गई थी। गांव वालों ने आपस में फैसला कर दिया था, लेकिन मकसूद इसे अपना अपमान समझता था। सुनीम व जाबीर को मारने की धमकी देता था। हत्या के समय मृतक के पास 35 हजार रुपये भी थे। मकसूद व उसके वालिद और चाचा इकरार भी ऐलानियां गांव में कह रहे थे कि जाबीर, उसके परिवार वाले के कत्ल करके ही सुनीम हत्याकांड में जेल जाएंगे। हत्या वाले दिन मकसूद गांव में था। घटना के बाद मुरादाबाद चला गया।
इस मामले में पुलिस ने इकरार व मकसूद के विरुद्ध सुनीम की हत्या में चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी। कोर्ट ने सुनीम की हत्या का दोषी पाते हुए इकरार व मकसूद को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।