बिजनौर के किरतपुर थाना क्षेत्र में फैले जानलेवा बुखार की चपेट में आकर एक किशोरी और युवती की मौत हो गई। बुखार से पीड़ित काफी लोग निजी चिकित्सकों के यहां उपचार करा रहे हैं। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि चिकित्सा प्रभारी अपने केंद्र पर नहीं रुकते हैं। स्वास्थ्य विभाग शिविरों के नाम पर भी महज खानापूर्ति कर रहा है।
मोहल्ला भुड्डी निवासी मुन्ना मलिक की 16 वर्षीय पुत्री गुलनाज को पिछले काफी दिनों से बुखार आ रहा था। परिजनों के अनुसार देसी दवाओं से उपचार चल रहा था। उसे आराम नहीं मिला और उसकी मौत हो गई। वहीं, गांव महेशपुर खेड़ी निवासी सत्यवीर सिंह की पुत्री पवित्रा (24) कई दिन से बुखार से पीड़ित थी। परिजनों ने पहले उसे समीपवर्ती गांव भोजपुर में एक निजी चिकित्सक को दिखाया, लेकिन हालत में सुधार न होने पर परिजन उसे बिजनौर ले गए। वहां पर आराम नहीं मिला तो परिजन चिकित्सकों की सलाह पर उसे ऋषिकेश एम्स में ले गए, वहां उपचार के दौरान गुरुवार की रात उसकी मौत हो गई।
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क्षेत्रवासियों का कहना है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र किरतपुर के चिकित्साधिकारी डॉ. जितेंद्र कुमार जब से किरतपुर आए हैं, तब से किरतपुर का स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सा व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं। हर बार पूछने पर स्टाफ द्वारा बिजनौर मीटिंग में जाना बताया जाता है। कहने को स्वास्थ्य विभाग लोगों को संचारी रोगों से बचाने के लिए शिविरों का आयोजन कराता है। लेकिन क्षेत्र में अभी तक एक भी शिविर का आयोजन नहीं कराया गया है। चिकित्सा प्रभारी डॉ. जितेंद्र कुमार ने बताया कि वे अपने केंद्र पर ही रहते हैं। मरीजों का भी ठीक प्रकार से इलाज किया जाता है।
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