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गंगा बैराज के पास बनेेगी कछुओं की हैचरी

Sun, 03 Feb 2019 11:13 PM IST
Deepak Sharma अमर उजाला ब्यूरो/बिजनौर
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बिजनौर में बैराज पर गंगा किनारे बैठा कछुआ। - फोटो : अमर उजाला
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बिजनौर में कछुए की प्रजाति बचाने को गंगा किनारे हैचरी बनाने को शासन ने मंजूरी दे दी है। कुछ महीने पहले इसका प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया था। अब गंगा के आसपास के क्षेत्र में मिट्टी से निकलने वाले कछुओं के अंडों को वन विभाग सहेजेगा।
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गंगा को प्रदूषण से मुक्त करने के लिए नमामि गंगे व हरीतिमा गंगा जैसी योजनाएं चलाई जा रही हैं। इन योजनाओं में गंगा किनारे सफाई अभियान चलाने से लेकर औषधीय पौधे तक लगाए जा रहे हैं। गंगा में पाए जाने वाले जीव भी गंगा की सफाई में अहम भूमिका निभाते हैं। कछुओं को भी गंगा का प्राकृतिक सफाई कर्मचारी कहा जाता है। गंगा नदी की धारा में कछुओं की 12 प्रजाति पाई जाती हैं। इनमें से छह प्रजाति खतरे में हैं।
कछुए गंगा नदी के तट पर रेत में घोंसला बनाकर अंडे देते हैं। गंगा नदी के बहाव का क्षेत्र हर साल बदल जाता है। जहां गंगा का पानी नहीं होता, वहां पर किसान खेती करने लगते हैं। इस जमीन की जुताई करने, खेतों में फसल को पानी देने व कीटनाशक का    प्रयोग करने से अंडे नष्ट होते हैं। किसान भी अंडों को फेंक देते हैं। ऐसे ही हर साल हजारों अंडे बर्बाद हो जाते हैं और कछुओं संख्या अपेक्षाकृत नहीं बढ़ती है। कछुओं के अंडों को सहेजकर उनकी संख्या बढ़ाने के लिए डब्ल्यूडब्ल्यूएफ (वर्ल्ड वाइल्ड फंड) ने अभियान चला रखा है। इस मुहिम से अब वन विभाग भी जुड़ गया है। कुछ माह पहले     गंगा किनारे हैचरी बनाने के लिए शासन से अनुमति मांगी गई थी। शासन ने वन विभाग को अनुमति   दे दी है। अनुमति मिलने के      बाद अब वन विभाग ने हैचरी बनाने के लिए उपर्युक्त स्थान देखना शुरू कर दिया है।
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जहां भी किसान के खेत में अंडे निकलेंगे, वन विभाग के कर्मचारी उन्हें किसानों से लेंगे। इन अंडों   को हैचरी में मानव निर्मित घोंसलों में रखा जाएगा। घोंसलों को सुरक्षित स्थान पर बनाया जाएगा। अंडों से कछुओं के बाहर आने के बाद    इन्हें गंगा की धारा में छोड़ दिया जाएगा। डीएफओ डा.एम सेम्मारन के मुताबिक गंगा किनारे हैचरी बनाने को मंजूरी मिल गई है।   इसके लिए जमीन चिह्नित की जा रही है। गांववालों को भी इस अभियान से जोड़ा जाएगा।

घोंसलों में तापमान का रखते हैं ध्यान
कछुए नवंबर से अप्रैल तक अंडे देते हैं। घोंसला बनाकर अंडा देते समय वे तापमान का ध्यान रखते हैं। कछुए घोंसले में अंडे की लेयर बनाते हैं। सबसे ऊपर की लेयर से बच्चे सबसे पहले निकलते हैं।
अंडे से निकलकर नदी में भागते हैं बच्चे
कछुआ अंडे देने के बाद घोंसले के बाद फिर नहीं आता है। फिर भी उसके बच्चे अंडे से निकलकर सीधे नदी की ओर ही भागते हैं।    वाइल्ड लाइफ के अधिकारी अभी भी इस पर शोध कर रहे हैं कि     ऐसा कैसे होता है।
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