सरेंडर के चक्रव्यूह में फंसा परिवहन विभाग
बिजनौर। परिवहन विभाग लॉकडाउन से लेकर अब तक राजस्व नुकसान से जूझ रहा है। नवंबर से 33 बसें और तीन मैजिक वाहन सरेंडर चल रहे हैं। कोरोना काल से पूर्व जिले में निर्धारित कुल 30 रूट पर करीब 267 बसों का संचालन होता था। अफसरों की मानें तो इन 20 मालिकों ने घाटे से उबरने के लिए वाहनों को सरेंडर किया है। इन 33 बसों से प्रति माह लगभग ढाई लाख रुपये और तीन मैजिक वाहन से करीब 17 हजार रुपये का टैक्स मिलता था। करीब तीन माह से परिवहन विभाग पौने तीन लाख रुपये की हानि झेल रहा है।
देशभर में कोरोना महामारी के कारण बीते वर्ष सहित जनपद बिजनौर में भी मार्च के अंतिम सप्ताह में लॉकडाउन लगा था। प्रथम लॉकडाउन में तो ट्रांसपोर्टर के वाहन जहां के तहां फंस गए थे। स्थिति संभलने पर शासन ने थोड़ी रियायत दी तो ट्रांसपोर्टर ने अपने वाहनों को वापस अपने जिले में बुला लिया था। इसके बाद परिवहन विभाग को मासिक व त्रैमासिक तौर पर टैक्स जमा करके उन्होंने घाटे से बचने के लिए अपने वाहन सरेंडर कर दिए थे। रोडवेज के बिजनौर संभाग के अधिकारियों ने भी कोरोना काल में करीब 25 बसों को सरेंडर कर दिया था। इसके बाद जुलाई से स्कूली वाहनों का भी सरेंडर होने का सिलसिला शुरू हो गया था। इसके चलते विभाग को लगातार नुकसान हो रहा है। अक्तूबर में कुछ वाहन मालिकों ने अपने वाहनों को रोड पर संचालित करना शुरू कर दिया था। इसके बाद जिले के करीब 33 बस मालिकों ने पर्याप्त यात्री न मिलने के कारण अपनी बसों को सरेंडर कर दिया। इनके साथ में तीन मैजिक वाहन संचालक भी इसी राह पर चले। एआरटीओ प्रशासन शिवशंकर सिंह के मुताबिक शासन के नियमानुसार वाहनों को सरेंडर किया गया है। जब भी वाहन मालिक चाहें तभी अपने वाहनों को इस बंदिश से आजाद करा सकते हैं।