जिले में लगेंगे तीन ऑक्सीजन प्लांट
बिजनौर। जिले में ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए तीन उद्यमियों ने आवेदन किया है। इन ऑक्सीजन प्लांटों से एक दिन में तीन हजार तक सिलिंडर भरे जा सकेंगे। उद्योगों के अलावा मेडिकल क्षेत्र में भी ये सिलिंडर काम आएंगे। अब तक जिले में एक दिन में 100 से 150 सिलिंडर ही भरे जाते थे।
कोरोना की दूसरी लहर जितने भयानक तरीके से इस बार फैली है वैसे पहली लहर नहीं थी। कोरोना मरीजों के लिए इस बार ऑक्सीजन सिलिंडरों की बहुत कमी सामने आ रही है। जिले में ऑक्सीजन सिलिंडर भरने का एक ही प्लांट है। यहां पर भी एक दिन में 100 से 150 सिलिंडर भरे जाते हैं। सिलिंडरों की जरूरत को देखते हुए प्रशासन ने औद्योगिक इकाइयों में इनके प्रयोग पर रोक लगा दी है। साथ ही ऑक्सीजन प्लांट के स्टॉक की भी निगरानी की जा रही है।
ऑक्सीजन सिलिंडर की कमी तो है, यह जरूरत है और व्यापार भी। सरकार ऑक्सीजन सिलिंडर प्लांट लगाने वालों को प्रोत्साहन देने की बात कह रही है। जिले के तीन उद्यमियों ने ऑक्सीजन सिलिंडर प्लांट लगाने के लिए आवेदन किया है। इन तीनों प्लांट में एक दिन में तीन हजार तक सिलिंडर आराम से भरे जा सकते हैं। कोरोना के खिलाफ जंग जारी है, लेकिन अगर ये प्लांट जल्दी काम शुरू कर देते हैं तो ऑक्सीजन की कमी नहीं रहेगी। साथ ही ऑक्सीजन सिलिंडरों के लिए आने वाले समय में दूसरे जिलों पर निर्भर नहीं रहना होगा। (संवाद)
ये होती है ऑक्सीजन की जरूरत
संक्रमण इस बार फेफड़ों को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। फेफड़ों में संक्रमण होने पर मरीज को सांस लेने में दिक्कत होती है। शरीर के लिए ऑक्सीजन बहुत जरूरी होती है। हवा में 78 प्रतिशत नाइट्रोजन और 21 प्रतिशत ही ऑक्सीजन होती है। फेफड़ों में संक्रमण की वजह से मरीज सांस ठीक से नहीं ले पाता है। जिससे उसके खून में ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। ऑक्सीजन सिलिंडर में एकदम शुद्ध ऑक्सीजन होती है जो खून में घुल जाती है। उद्यमी सौरभ माथुर, सुमित अग्रवाल के अनुसार उन्होंने ऑक्सीजन प्लांट लगवाने के लिए आवेदन किया है। आवेदन मंजूर होते ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।