जिले के तीन ब्लॉक अति दोहित, एक क्रिटिकल जोन में शामिल
बिजनौर। जिले में भूगर्भ से जितना पानी निकाला जा रहा है, उतना पानी जमीन में दोबारा नहीं जा रहा है। रिचार्ज होने वाले जल के मुकाबले दोहन 120 प्रतिशत ज्यादा है। इसका असर दिखने लगा है। जिले के तीन ब्लॉक में दोहन की स्थिति काफी बढ़ गई है। ये ब्लॉक अति दोहित श्रेणी में आ गए हैं।
क्षेत्रफल के हिसाब से बिजनौर बड़ा जिला है। जिले का क्षेत्रफल छह हजार 561 स्क्वायर किलोमीटर व 2011 की जनगणना के अनुसार आबादी 36 लाख 83 हजार 896 है। बिजनौर में मुख्य रूप से खेती पर आधारित है। खेती के अलावा उद्योगों में प्रयोग होने वाले 70 से 90 प्रतिशत तक जल की आपूर्ति भूगर्भ से ही होती है। प्रकृति का नियम कहता है कि मनुष्य उससे जितना ले उतना लौटाए भी चाहे वो वृक्षों के रूप में हो या फिर पानी के रूप में। भूगर्भ जल को मापने के लिए सिंचाई विभाग द्वारा जगह-जगह पिजो मीटर लगे होते हैं। भूगर्भ जल के गिरते स्तर को पिजो मीटर के जरिए मापा जाता है। जिले भर में 137 पिजो मीटर लगे हैं। 19 पिजो मीटर शहरी क्षेत्र में व 118 पिजो ग्रामीण क्षेत्र में लगे हैं। इन पिजो मीटर से देखा जाता है कि किसी क्षेत्र में हर साल पानी का दोहन कितना होता है और कितना पानी हम जमीन को लौटाते हैं। पिजो मीटर से मिलने वाले आंकड़े चौंकाने व डराने वाले हैं। जिले में हम हर साल जितना पानी जमीन से लेते हैं, उससे कम पानी जमीन में वापस जा पाता है। जमीन से दोहित होने वाले जल की मात्रा रिचार्ज होने वाले जल से 120 प्रतिशत ज्यादा है। जिले के तीन ब्लॉक स्योहारा, नूरपुर व जलीलपुर में पानी का दोहन बहुत ज्यादा हो रहा है। इसके मुकाबले बहुत कम पानी ही जमीन में वापस लौट रहा है। शासन ने इन तीन ब्लॉक को अति दोहित ब्लॉक घोषित किया है। इसके अलावा नहटौर ब्लॉक भी क्रिटिकल जोन में शामिल हो गया है। यहां भी पानी के दोहन के मुकाबले पानी रिचार्ज बहुत कम हो रहा है।
ब्लॉक वार पानी रिचार्ज और दोहन पर नजर
ब्लॉक पानी रिचार्ज दोहन
धामपुर 1.38 1.87
अफजलगढ़ 1.80 2.63
किरतपुर 1.79 2.16
कोतवाली 1.42 2.16
देवमल 0.50 1.34
नजीबाबाद 0.82 4.66
हल्दौर 1.30 0.97
जलीलपुर 0.92 0.40
नहटौर 1.26 0.57
नूरपुर 0.77 0.30
स्योहारा 1.51 0.10
नगरीय क्षेत्र 1.31 0.61
औसत 1.23 1.48
नोट:आंकड़े लीटर प्रति मीटर में है।
यह है दोहन का आधार
अगर भूगर्भ में 100 लीटर पानी जा रहा है और उसमें से 70 प्रतिशत का दोहन हो रहा है तो यह सुरक्षित स्थिति है। 30 प्रतिशत ज्यादा पानी भविष्य के लिए सुरक्षित रहता है। अगर पानी 70 से 80 प्रतिशत तक निकाला जाता है तो यह सेमी क्रिटिकल स्थिति है। 80 से 100 प्रतिशत दोहन होना क्रिटिकल जोन में आता है। 100 प्रतिशत से अधिक दोहन अति दोहित श्रेणी में आता है।
इतना होता है दोहन
प्रशासन द्वारा कराए गए एक सर्वे के अनुसार जिले में भूगर्भ से हर साल छह लाख 75 हजार 28 हेक्टो मीटर पानी का दोहन होता है। सर्वे में माना गया है एक हेक्टेयर जमीन में खड़े एक मीटर पानी में से इतने पानी का दोहन साल में होता है, जबकि इसके बदले जमीन में पांच लाख 61 हजार तीन हेक्टो मीटर पानी ही जमीन में जाता है। भूगर्भ जल के रिचार्ज होने की मात्रा के मुकाबले जल का दोहन 120.32 प्रतिशत तक ज्यादा है।
अनेक स्रोत हैं दोहन व रिचार्ज के
जिले में भूगर्भ से दोहित होने व रिचार्ज होने वाला जल अनेक स्रोतों से मिलता है। जिले में पानी का दोहन करने के लिए मुख्य रूप से 675 सरकारी नलकूप, 91879 निजी नलकूप, 800 गहरे नलकूप व 1359 किलोमीटर लंबी नहरें हैं। इनके आधार पर ही पानी का दोहन व भूगर्भ जल का रिचार्ज होना निर्भर करता है।
केवल 2.5 प्रतिशत जल पीने लायक
पृथ्वी पर मौजूद जल में से 97.5 प्रतिशत समुद्र में है। यह पानी खारा है और पीने लायक नहीं है। केवल 2.5 प्रतिशत पानी ही पीने लायक है। पीने लायक जल का भी .30 प्रतिशत हिस्सा नदियों व झीलों के रूप में है। 30.8 प्रतिशत हिस्सा भूगर्भ जल के रूप में तथा 68.9 प्रतिशत हिस्सा ग्लेशियर आदि के रूप में मौजूद है।
ऐसे करें जल की बचत
-ब्रश करते व दाढ़ी बनाते समय टोटी कम से कम खोलें, मग का प्रयोग करें।
-बर्तन मांजते समय नल बंद रखें। धोते समय ही नल खोलें।
-जल की धार धीमी रखें, टपकती टोटियों को ठीक कराएं।
-गाड़ी की धुलाई पाइप लगाकर न करें, बाल्टी में पानी लेकर गाड़ी धोएं।
-सड़क पर पानी न डालें।
-कम खपत वाले फ्लश का प्रयोग करें। इससे प्रतिदिन दस लीटर पानी बचेगा।
-पानी की टंकी में वॉल्व लगवाएं। टैंक को ओवर फ्लो न होने दें।
किसान भी करें बचत
-फसलों की सिंचाई क्यारी बनाकर करें।
-सिंचाई की नाली पक्की करें या पीवीसी पाइप का प्रयोग करें।
-बागवानी की सिंचाई के लिए ड्रिप या स्प्रिंकलर का प्रयोग करें।
-सिंचाई में आवश्यकतानुसार पानी ही प्रयोग करें।
-जल की कमी वाले क्षेत्र में कम पानी की जरूरत वाली फसल बोएं।
-अत्यधिक भूजल गिरावट वाले क्षेत्र में पानी की अधिक खपत वाली फसल न बोएं।
सहयोग करें जिलेवासी:सीडीओ
सीडीओ प्रवीण मिश्र के अनुसार जिले में पानी का दोहन रिचार्ज के मुकाबले 120 प्रतिशत ज्यादा है। जिलेवासी अपने बच्चों के भविष्य के लिए अभी से सजग हो जाएं। जिला प्रशासन भूगर्भ जल के कम से कम दोहन के लिए जागरूकता अभियान चला रहा है, लेकिन बिना जनता के सक्रिय सहयोग के यह मुमकिन नहीं है। भूगर्भ जल की बचत के लिए सभी अपना कर्तव्य समझें और जल की बचत करना अभी से शुरू करें।