बिजनौर में तहसील के बाहर खड़ी साइकिल। संवाद
बिजनौर। तहसील के बाहर बने स्टैंड में खड़ी पीले रंग से रंगी साइकिलों को देख लॉकडाउन का मंजर जहन में उभर आता है। सड़कों पर पसरे सन्नाटे को चीरते हुए इन्हीं साइकिलों से हजारों मजदूरों ने अपने घर की राह पकड़ी थी, लेकिन दुर्भाग्य रहा कि ये न तो अपने सवारों को उनके घर तक पहुंचा पाईं और न ही खुद का ठिकाना तलाश सकीं।
मजदूरों से जब्त साइकिलों को जिला प्रशासन ने बाइक्स ऑफ बिजनौर के नाम से किराये पर चलाने की शुरुआत की थी, लेकिन यह भी कामयाब न हो सकी।
n बिजनौर तहसील में जमा थीं 350 साइकिलें : हरियाणा, पंजाब और उत्तराखंड आदि प्रदेशों से साइकिलों से लौट रहे मजदूरों को प्रशासन ने यहीं रोक लिया था। उनकी साइकिलें यहीं रखवाकर उन्हें वाहनों से घर भेजा गया। बिजनौर तहसील क्षेत्र से 350 साइकिल जमा की गईं थीं। इन्हें इंदिरा बाल भवन में रखा गया था। 2021 में साइकिल मालिकों से संपर्क किया गया तो कुछ लोग अपनी साइकिलें ले गए थे। इसके बावजूद सौ से ज्यादा साइकिलों को लेने कोई नहीं आया।
n किराये पर चलाने की थी योजना, लोगों ने नहीं ली रूचि : 2021 में जिले में तैनात संयुक्त मजिस्ट्रेट विक्रमादित्य मलिक ने मजदूरों की साइकिलों को बाइक्स ऑफ बिजनौर के नाम से किराये पर चलाने की योजना बनाई। करीब 100 साइकिलों पर पीला रंग कराया गया। मरम्मत कराई। शहर में दस साइकिल स्टैंड बनवाए। चार घंटे के लिए पांच रुपये व 12 घंटे के लिए दस रुपये में साइकिल किराए पर देना तय किया। किसी ने भी इन साइकिलों को किराये पर नहीं लिया।