तराई में गुलदार के लिए खाने को है भरपूर शिकार
बिजनौर। गुलदारों ने तराई क्षेत्र में गन्ने के खेतों को अपना नया ठिकाना बना लिया है। पहले केवल फिशिंग कैट ही तराई क्षेत्र में रहना पसंद करती थी, लेकिन अब गुलदार भी तराई क्षेत्र में रहने लगे हैं। खासतौर से मालन नदी का किनारा गुलदारों की पसंदीदा जगह बन गया है। गुलदार ने जिले में सभी छह लोगों को मालन नदी के किनारे बसे गांवों में ही शिकार बनाया है।
शेर प्रजाति सामान्य तौर पर पानी में भीगना पसंद नहीं करती है। अब तक इस प्रजाति में केवल फिशिंग कैट ही नदियों के किनारे रहती थी। लेकिन अब गुलदार ने भी तराई को अपना ठिकाना बना लिया है। मालन नदी के तट को गुलदारों ने अपने लिए मुफीद मान लिया है। गुलदार मालन किनारे ही डेरा डाल रहे हैं। गुलदार ने अब तक जिन छह लोगों की जान ली हैं वे सभी गांव मालन नदी के किनारे ही बसे हैं। इनमें केवल नवादा ही मालन नदी से थोड़ा ज्यादा दूर है। बाकी गांव मालन नदी के तट से दस किलोमीटर के आसपास ही हैं। तराई में बसने पर गुलदार को नदी पर पानी पीने आने वाले वन्य जीवों के साथ साथ गांवों में जाकर कुत्ते, भेड़, बकरी को निवाला बनाने का भरपूर मौका मिलता है। गुलदार तराई क्षेत्र में वन्य जीवों की जमकर दावत उड़ाते हैं। प्रजनन करने के लिए गन्ने के खेत भी गुलदार की पसंदीदा जगह हैं। गन्ने के खेत बहुत घने होते हैं। वहां सर्दी से भी आसानी से शावकों को बचाया जा सकता है। साथ ही मादा गुलदार के शिकार पर जाने के समय शावक आराम से खेत में छिपे रह सकते हैं। गुलदार के शावक भी गन्ने के खेतों में ही मिलते हैं।