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कोर्ट के आदेश के बाद भी खाली नहीं कराया गया गांव रामपुर ठकरा

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बिजनौर का गांव रामपुर ठकरा। - फोटो : BIJNOR
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कोर्ट के आदेश के बाद भी खाली नहीं हुआ गांव
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बिजनौर। गांव रामपुर ठकरा को खाली कराने के कोर्ट के आदेश के बाद भी प्रशासन व वन विभाग अब तक कोई प्रयास शुरू नहीं किए हैं। वन विभाग की करीब 600 बीघा जमीन पर अब भी गांव वालों का कब्जा है। गांव वालों से कब्जा छुड़ाने के लिए प्रशासन प्रयास भी नहीं कर रहा है। इस मामले में कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। वन विभाग की जमीन पर अब भी पूरा गांव बसा हुआ है।
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गांव रामपुर ठकरा की जमीन साल 1968 में शासन द्वारा वन विभाग को दे दी गई थी। वन विभाग की जमीन में निर्माण कार्य नहीं हो सकता है और न ही बिजली की लाइन खिंची जा सकती हैं। लेकिन गांव रामपुर ठकरा में नियमों को ताक पर रखकर ये सब कार्य किए गए। गांव में दो दशक से भी पहले शिक्षा विभाग द्वारा प्राइमरी स्कूल खोला जा चुका है। पूरे गांव के बच्चे यहां पढ़ते हैं। इसके अलावा गांव में राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के अंतर्गत आठ साल पहल बिजली के खंभे गाड़कर बिजली की लाइन भी खिंची गई। गांव में ग्राम पंचायत द्वारा सड़कें भी बनी हैं। गांव की मुख्य सड़क की हालत इतनी अच्छी है कि शहर में भी ऐसी सड़क नहीं हैं। वन विभाग के अफसरों की नाक के नीचे अलग अलग विभागों ने गांव में नियमों की धज्जियां उड़ाईं व निर्माण कराया। हालांकि विद्युत निगम ने करीब तीन साल पहले गांव की बिजली काट दी थी। वन विभाग की करीब 600 बीघा जमीन पर अवैध कब्जा है। दिसंबर 2016 में कोर्ट ने गांव को खाली कराने के आदेश वन विभाग को दिए थे। तब कोर्ट ने गांव वालों को जमीन पर खड़ी फसल को काटने के लिए छह महीने का समय भी दिया था। सितंबर 2017 में वन विभाग ने जमीन को खाली करने के लिए अभियान चलाया था। तब महिलाओं ने हंगामा किया था। धूप में हंगामे के दौरान कई महिलाएं बेहोश भी हो गईं थीं। उस अभियान के बाद से अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। गांव वालों का कहना था कि रामपुर ठकरा गांव मुजफ्फरनगर सीमा में है। गांव की जमीन की पैमाईश कराने की वे मांग कर रहे हैं। वन विभाग के रेंजर शरद गुप्ता के अनुसार रामपुर ठकरा की जमीन वन विभाग की है। इस पर वन विभाग का अधिकार है। जमीन की पूरी स्थिति के बारे में प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है।
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