हिंदुत्व और राष्ट्र सेवा की सोच ने दी जन्मभूमि आंदोलन को ऊर्जा
नजीबाबाद। हिंदुत्व की रक्षा के साथ राष्ट्र सेवा और सद्भावना की सोच रखने वालों की नवाब नजीबुद्दौला के बसाए नगर में सक्रिय भागीदारी रही। ऐसी सोच ने ही श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन को ऊर्जा दी।
जनसंघ के दौर में वर्ष 1960 के दशक में नगर में बजरंग दल, आरएसएस और विहिप के नेताओं ने हिंदुत्व की भावना से कार्य किया। डॉ. आमोद अरोड़ा, शंभूनाथ कौशिक, बृज बिहारी माहेश्वरी, सत्यप्रकाश गुप्ता, जगदीश प्रसाद अग्रवाल, जगनलाल, मुरारी सिंह, शिव लाल, राजन टंडन गोल्डी, कलवा शेख मंसूरी, राजाराम पाल, सहित अनेक ऐसे चेहरे रहे, जिन्होंने भारतीय संस्कृति और राष्ट्र सेवा के लिए जीवन समर्पित कर दिया।
वर्तमान में सामाजिक संस्था पंड़ित दीनदयाल उपाध्याय प्रतिष्ठान के जिलाध्यक्ष डॉ. आमोद अरोड़ा बताते हैं कि नजीबाबाद से हिंदुत्व की रक्षा और भगवान श्रीराम की जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन की आवाज हमेशा बुलंद रही। अयोध्या में विवादित ढांचा गिरने के बाद जिस समय कल्याण सिंह की सरकार बर्खास्त हुई थी। उस समय बजरंग दल और हिंदू संगठनों से जुड़े क्षेत्रीय नेताओं ने साइकिल रैली के माध्यम से श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन जारी रखा। भगवान श्रीराम नाम की शिलाएं ठेली पर रखकर गांव-गांव जन्मभूमि आंदोलन को ऊर्जा देने का अभियान चलाया गया।
भाजपा की जिला कार्यकारिणी में महत्वपूर्ण पदों पर आसीन रहे डॉ.आमोद अरोड़ा और शंभूनाथ कौशिक को वर्ष 1972 में बंगलादेश मान्यता आंदोलन में अटल बिहारी वाजपेयी के साथ गिरफ्तारी देने का सौभाग्य मिला।
वरिष्ठ भाजपा नेता शंभूनाथ कौशिक, युवावस्था से ही हिंदू संगठनों से जुड़े राजन टंडन गोल्डी कहते हैं कि अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पूजन से श्रीराम का भव्य मंदिर निर्माण होने का स्वप्न जल्द साकार होने से समूचा राष्ट्र गर्व महसूस कर रहा है।
शंभूनाथ कौशिक।- फोटो : NAZIBABAD
आमोद अरोड़ा।- फोटो : NAZIBABAD