हरिद्वार काशीपुर हाईवे दरकने के बाद लगाए गए डायवर्जन के निशान स्रोत विभाग
बिजनौर। हरिद्वार-काशीपुर नेशनल हाईवे में सीमेंट से बनी सड़क जगह-जगह मियाद से पहले ही दरक चुकी है। हालांकि टूटी सड़क को ठीक करने के लिए अमला जुटा हुआ है। फिलहाल शेरकोट के आस पास मरम्मत का काम चल रहा है। यह हाईवे दस साल के लिए गारंटी पीरियड में है।
हरिद्वार से काशीपुर तक करीब दो हजार करोड़ की लागत से फोरलेन में तब्दील किया जाना था। जिसमें नगीना से काशीपुर तक हाईवे साल 2020 में बनकर तैयार हो गया था। इस हिस्से में पुरैनी प्लाजा पर जून 2021 से टोल भी वसूला जा रहा है।
अब इस बरसात में नगीना से काशीपुर तक कई जगह सड़क टूट चुकी थी। जिन जगहों पर छोटी दरार थी, उन्हें पहले ही ठीक कर लिया गया था। मगर सात जगहों पर मामूली मरम्मत से काम नहीं चल पाया। जिसके चलते चार जगहों पर टूटे हुए हिस्से को तोड़कर फिर से सीमेंट वाली सड़क बना दी गई है। अभी तीन जगहों पर काम होना बाकी है। कुछ जगहों पर सड़क की दबक को तारकोल की परत से खत्म किया गया है।
ताज्जुब की बात तो यह है कि अभी तक गारंटी पीरियड भी खत्म नहीं हुआ है। नेशनल हाईवे के सूत्रों की मानें तो दस सालों तक सड़क में कोई भी खामी आने पर निर्माण करने वाली संस्था जिम्मेदार होती है। टूट-फूट या मरम्मत की मद में एक निश्चित बजट भी रोककर रखा जाता है।
नगीना से हरिद्वार तक अभी काम है अधूरा
हरिद्वार से नगीना तक फोरलेन का निर्माण पांच साल बीतने के बाद भी पूरा नहीं हुआ है। जिसमें नजीबाबाद बाईपास का निर्माण अधूरा है। इसके अलावा भागूवाला से हरिद्वार के बीच वन्य जीव गलियारों के रूप में बन रहे ओवरब्रिज भी निर्माणाधीन है। इस दूरी में हाईवे का पूरी तरह से नहीं होने के कारण भागूवाला में टोल की वसूली भी चालू नहीं हो सकी है।