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अनारक्षित रहेगा जिपं अध्यक्ष का पद

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अनारक्षित रहेगा जिपं अध्यक्ष का पद
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बिजनौर। जिले पर त्रि स्तरीय पंचायत चुनाव की नए सिरे से आरक्षण प्रक्रिया शुरू हो गई है। सभी पदों के आरक्षण आज (19 मार्च) पूरा हो जाएगा। अंतिम आरक्षण सूची का प्रकाशन 20 मार्च से शुरू होगा। सूची पर 23 मार्च से आपत्तियां ली जाएंगी। जिला पंचायत अध्यक्ष का पद इस बार अनारक्षित रहेगा।
न्यायालय ने त्रि स्तरीय पंचायत चुनाव के विभिन्न पदों का वर्ष 2015 को आधार वर्ष मानकर आरक्षण करने को कहा है। इसको लेकर शासन से बुधवार को देर रात आरक्षण कार्यक्रम प्रशासन को मिला। कार्यक्रम के अनुसार जनपद स्तर पर सभी पदों के आरक्षण प्रस्ताव तैयार करने के लिए 18 मार्च से 19 मार्च तक का समय दिया गया है। प्रशासन समय सीमा कम होने के कारण बृहस्पतिवार सुबह से आरक्षण प्रक्रिया तैयार करने में जुटा है। जिले में 1123 ग्राम पंचायत हैं। जिला स्तर पर पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत प्रमुख, क्षेत्र पंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य के पदों का आरक्षण होना है। ग्राम प्रधान के लिए 700 से अधिक पंचायत विभिन्न श्रेणी में आरक्षित होनी हैं। छह पद प्रमुख के आरक्षित होंगे। जिला पंचायत सदस्य व क्षेत्र पंचायत सदस्य के आरक्षित होने वाले पद भी काफी संख्या में है। सबसे अधिक आरक्षण ग्राम पंचायत सदस्य का है।
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अंतिम आरक्षण सूची का प्रकाशन 20 मार्च से 22 मार्च तक होगा। इसके बाद 23 मार्च तक आपत्ति ली जाएंगी। आपत्तियों का निस्तारण 24 मार्च से 25 मार्च तक होगा। बताया कि 26 मार्च को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन होगा। डीपीआरओ सतीश कुमार ने बताया कि आरक्षण की प्रक्रिया समयबद्ध है। काम अधिक है तथा समय कम है। फिर भी आरक्षण समय से पूरा हो जाएगा। आरक्षण सूची का प्रकाशन ब्लॉक, डीपीआरओ, सीडीओ व डीएम कार्यालय पर होगा। आपत्ति इन चारों दफ्तरों में कहीं भी दी जा सकती हैं। सभी आपत्ति इकट्ठा करके डीपीआरओ दफ्तर आ जाएंगी। आपत्तियों के निस्तारण के लिए डीएम रमाकांत पांडेय की अध्यक्षता में समिति बनी है। सीडीओ केपी सिंह, डीपीआरओ सतीश कुमार व अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत इसके सदस्य हैं।
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ये रहेगी आरक्षण प्रक्रिया
आरक्षण का आधार वर्ष 2015 है। इसका मतलब है कि कोई पंचायत वर्ष 2015 में जिस श्रेणी में आरक्षित रही है, इस बार उसमें आरक्षित नहीं होगी। आरक्षण को तय नियमों के अनुसार आगे बढ़ाया जाएगा। पंचायत को किसी भी श्रेणी में आरक्षित करने के लिए उस श्रेणी की आबादी के अवरोही अर्थात घटते क्रम में लगाया जाएगा। इसके बाद तय नियमों के अनुसार उस श्रेणी की आवंटित संख्या के अनुसार पंचायतों को लिया जाएगा।
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