बिजनौर। बिजनौर ही नहीं, पश्चिमी उत्तर प्रदेश को शुगर बाउल के नाम से जाना जाता है। यहां गन्ना किसानों के बीच लंबे समय से अधिक पैदावार देने वाली को.0238 प्रजाति का दबदबा रहा है। बिजनौर जिले में इसका क्षेत्रफल करीब 98 प्रतिशत तक पहुंच गया था। इस प्रजाति ने किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने में अहम भूमिका निभाई, लेकिन अब रोगग्रस्त होने के कारण किसान इसके विकल्प की तलाश में हैं। ऐसे में नई गन्ना प्रजाति को.शा. 23232 किसानों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई है।
इसके पौधा गन्ना की औसत उपज 95.56 टन प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई, जो लंबे समय से प्रचलित मानक प्रजाति को.0238 से 9.44 प्रतिशत अधिक है। गन्ने में शर्करा (चीनी परता) की मात्रा और पेड़ी की उपज के मामले में भी को.शा.23232 ने बेहतर प्रदर्शन किया है। इसे खेती के लिए स्वीकृति दे दी गई है।
-को.शा.23232 प्रजातियों को दी स्वीकृत
बुधवार को मिनिस्ती एस आयुक्त गन्ना एवं चीनी की अध्यक्षता में गन्ना आयुक्त कार्यालय के सभागार में बीज गन्ना एवं गन्ना किस्म स्वीकृति उप समिति की बैठक में कई प्रजातियों को स्वीकृति दी गई। उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद शाहजहांपुर की ओर से प्रस्तावित को.शा.23232, को.शा.23231, को.शा.19235 और को.शा.18232 के उत्पादन और शर्करा संबंधी आंकड़े प्रस्तुत किए गए। इनमें को.शा.23232 का प्रदर्शन बेहतर पाया गया। इसके अलावा भी कई प्रजातियों को स्वीकृत किया गया है।
-मिठास और पेड़ी में भी बेहतर
अफसरों व वैज्ञानिकों का कहना है कि को.शा.23232 की पौधा गन्ना औसत उपज 95.56 टन प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई है। यह मानक प्रजाति को.0238 की तुलना में शर्करा 9.44 प्रतिशत अधिक है। नई प्रजाति में गन्ने की मिठास और पेड़ी की पैदावार भी बेहतर मिली है। इसके बेहतर प्रदर्शन के बाद इसे खेती के लिए स्वीकृति दे दी गई है।
-वर्जन
-नई गन्ना किस्म को.शा. 23232 के आंकड़े बेहतर
अपर गन्ना आयुक्त विकास वीके शुक्ला ने बताया कि नई गन्ना प्रजातियों के परीक्षण में उत्पादन, शर्करा और रोग प्रतिरोधक क्षमता जैसे मानकों को ध्यान में रखा गया है। उप्र गन्ना शोध परिषद शाहजहांपुर द्वारा प्रस्तावित नई गन्ना किस्म को.शा.23232 के आंकड़े बेहतर पाए जाने पर इसे खेती के लिए स्वीकृति दी गई है। को.शा.23232 को लाल सड़न रोग के प्रति रोगरोधी और अच्छी पेड़ी वाली किस्म है।
- नई उन्नत प्रजातियों से बढ़ेगी पैदावार
जिला गन्ना अधिकारी ब्रजेश कुमार पटेल ने बताया कि जिले में करीब 2.65 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ने की खेती होती है। जिले में गन्ने की पेराई के लिए 10 चीनी मिलें संचालित हैं। ऐसे में नई प्रजाति से गन्ने की पैदावार और चीनी उत्पादन बढ़ेगा।