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Bijnor News: रिमझिम रिमझिम बरसा सावन, महका कतरा बहका बहका सा मन

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बिजनौर। साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था ऊर्जा के तत्वावधान में सावन, शिवरात्रि के उपलक्ष्य में एक ऑनलाइन काव्य गोष्ठी हुई। इसमें विभिन्न क्षेत्रों से महिला कवयित्रियों एवं वक्ताओं ने सहभागिता की। कवयित्री सुमन चौधरी सुमन की कविता रिमझिम रिमझिम बरसा सावन, महका कतरा-कतरा बहका-बहका सा मन सराहनीय रही।
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कार्यक्रम में सर्वप्रथम मां सरस्वती वंदना रंजना हरित रस्तोगी द्वारा प्रस्तुत की गई। अन्य कवयित्रियों ने मां को भाव पुष्प अर्पित किए। संस्था की संस्थापिका चौधरी सुमन ने सभी का स्वागत किया। डॉ. सारंगा देश असीम अध्यक्षता में कविता, गीत, लोकगीत, मुक्तक, भजन आदि की सुंदर प्रस्तुति ने समां बांध दिया। अर्चना चौहान ने कुछ संदूक भरे हैं, मैंने कोरी यादों के गीत की प्रस्तुति दी। डॉ. वंदना शर्मा ने कैसे भूलूं घर का आंगन, रितु बाला की घनन-घनन घटा घनघोर छाई घनाक्षरी छंद पर आधारित रचना ने खूब वाहवाही बटोरी। निरुपमा सिंह ने अपनी कविता सावन का मेघ हूं प्रस्तुति दी। रुपाली अग्रवाल ने नव गीत फिर आया सावन की सुंदर प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का संचालन रितु बाला रस्तोगी ने किया। सुनीता सिंह, प्रतिमा गर्ग, राशि, रेनू मित्तल अनेक गणमान्य महिलाओं की उपस्थिति सराहनीय रही।
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