धर्मेन्द्र भुइयार
स्योहारा। स्योहारा में प्रस्तावित रेलवे ओवरब्रिज निर्माण की प्रक्रिया को एक बार फिर तकनीकी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। करीब दो माह से चल रही मिट्टी की वहन क्षमता (बेयरिंग कैपेसिटी) जांच में अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने के बाद रेलवे विभाग ने दोबारा विस्तृत परीक्षण कराने का निर्णय लिया है। अब लगभग 40 मीटर गहराई तक मिट्टी की जांच की जाएगी, जिसके बाद दूसरे स्थान पर भी परीक्षण कर यह तय किया जाएगा कि पुल की नींव के लिए कौन सा स्थान और मिट्टी सबसे उपयुक्त रहेगी।
स्योहारा-बहसूमा–चांदपुर–ठाकुरद्वारा राज्य मार्ग संख्या-147 पर प्रस्तावित ओवरब्रिज निर्माण के लिए रेलवे विभाग द्वारा पिछले करीब दो माह से रेलवे फाटक के समीप मिट्टी की वहन क्षमता का परीक्षण कराया जा रहा था, लेकिन प्रारंभिक जांच में मिट्टी निर्धारित मानकों पर खरी नहीं उतर सकी। जानकारी के अनुसार, पुल की मजबूत नींव सुनिश्चित करने के लिए विशेषज्ञों की टीम ने लगभग 22 मीटर गहराई तक मिट्टी की जांच की थी। इसके बाद मिट्टी की भार वहन क्षमता परखने के लिए परीक्षण स्थल पर करीब एक हजार टन वजन रखकर लोड टेस्ट भी किया गया। जांच के दौरान प्राप्त आंकड़ों के विश्लेषण में पाया गया कि प्रस्तावित स्थान की मिट्टी अपेक्षित क्षमता नहीं दर्शा रही है। तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर अब रेलवे विभाग ने पुनः विस्तृत जांच कराने का फैसला लिया है। अगले चरण में 40 मीटर गहराई तक मिट्टी की ड्रिलिंग और परीक्षण किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अधिक गहराई पर मिट्टी की स्थिति और संरचना का अध्ययन करने के बाद ही पुल की नींव के लिए अंतिम निर्णय लिया जा सकेगा।
वर्तमान परीक्षण स्थल के अलावा दूसरे संभावित स्थान पर भी मिट्टी की वहन क्षमता की जांच कराई जाएगी। वहां भी लोड टेस्ट सहित विभिन्न तकनीकी परीक्षण किए जाएंगे, जिससे यह निर्धारित हो सके कि मिट्टी कितने भार को सुरक्षित रूप से वहन कर सकती है। उधर, रेलवे ओवरब्रिज परियोजना को लेकर स्थानीय लोगों की उम्मीदें लगातार बनी हुई हैं। शहर में वर्षों से रेलवे फाटक पर लगने वाले जाम से राहत दिलाने के लिए यह परियोजना बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
हालांकि तकनीकी परीक्षणों में लग रहा अतिरिक्त समय और अतिक्रमण हटाने की धीमी प्रक्रिया परियोजना की समयसीमा को प्रभावित कर सकती है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा और गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। सभी तकनीकी मानकों की पुष्टि होने के बाद ही निर्माण कार्य के अगले चरण को गति दी जाएगी, ताकि भविष्य में पुल की मजबूती और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
क्या है बेयरिंग कैपेसिटी टेस्ट
पुल निर्माण से पहले मिट्टी की बेयरिंग कैपेसिटी जांच की जाती है। इसके तहत यह परखा जाता है कि जमीन पुल के पिलर और सुपर स्ट्रक्चर का कितना भार सुरक्षित रूप से वहन कर सकती है। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही पिलरों की गहराई, डिजाइन और नींव का स्वरूप तय किया जाता है।