बिजनौर में ग्राम विकास अधिकारी संघ और ग्राम पंचायत अधिकारी एसोसिएशन की संयुक्त बैठक में डीएम द्वारा पिछले पांच वर्षों के विकास कार्यों की जांच कराने पर आंदोलन को चेताया है। आर्थिक और मानसिक उत्पीड़न करने का हवाला देते हुए सामूहिक त्यागपत्र देने की चेतावनी दी है। अपनी मांगों को लेकर 25 जनवरी को जिला परियोजना अधिकारी से वार्ता करने और तीन दिन के भीतर मांग पूरी न होने पर आंदोलन करने का निर्णय लिया।
ब्लॉक मोहम्मदपुर देवमल के बीडीओ कार्यालय के प्रांगण में आयोजित बैठक में वक्ताओं ने कहा कि ग्राम विकास व ग्राम पंचायत अधिकारी का उत्पीड़न किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ग्राम विकास अधिकारी संघ के जिलाध्यक्ष महेश चंद्र शर्मा ने कहा कि पंचायत सचिवों द्वारा 29 विभागों के कार्यों का संपादन किया जाता है। प्रत्येक पंचायत सचिव पर अत्यधिक कार्यभार है, जबकि उसके पास क्रियान्वयन कराने के लिए कोई लिपिक और कंप्यूटर आपरेटर भी नहीं है। वक्ताओं ने डीएम द्वारा गांवों में पिछले पांच वर्षों में कराए गए विकास कार्यों की जांच कराने के आदेश पर चिंता जताई और कहा कि यह न्यायोचित नहीं है।
वक्ताओं ने कहा कि प्रतिवर्ष गुणवत्ता में दस प्रतिशत का ह्रास होता है। पांच वर्षों के कार्यों की जांच को तुगलकी फरमान बताते हुए कहा कि इस आदेश से पंचायत सचिवों का आर्थिक व मानसिक शोषण होने की प्रबल संभावना है यदि इस आदेश को वापस नहीं लिया गया तो ग्राम विकास अधिकारी व ग्राम पंचायत अधिकारी अपने पदों से सामूहिक रूप से इस्तीफा देंगे। बैठक में तय किया गया कि मामले को लेकर संगठन 25 जनवरी को जिला परियोजना निदेशक से भी मिलेगा तथा तीन दिन के भीतर समाधान न हुआ तो आंदोलन तेज किया जाएगा।
वक्ताओं ने उच्च अधिकारियों द्वारा अपने अधीनस्थ कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने, निलंबित करने की कार्रवाई, जेल भेजने जैसी शब्दावली का प्रयोग करने पर चिंता जताई। ग्राम विकास अधिकारी वीरेंद्र कुमार की अध्यक्षता व धीरज कुमार चौधरी के संचालन में आयोजित बैठक में जिला मंत्री अजय पाल सिंह, सत्येंद्र कुमार, अशोक कुमार, मुकेश कुमार, संजीव, राजीव कुमार, वीरेंद्र सिंह आदि ने विचार रखे।
328 करोड़ की धनराशि की होगी जांच : डीएम
डीएम वीके आनंद के मुताबिक ग्राम पंचायतों में पिछले पांच वर्षों में आए 328 करोड़ रुपये की शिकायत मिल रही है। ग्राम पंचायतों में पांच साल में आई इस धनराशि का जायजा लिया गया तो पता चला कि इसकी कोई जांच नहीं हुई है। कई गांवों में अभिलेख तक तैयार नहीं किए गए, कोई रिकार्ड भी नहीं है। इसकी जांच के लिए प्रशासनिक व तकनीकी अफसर की टीम जांच करने के लिए बनाई गई। जांच के बाद पता चलेगा कितना धन गायब है। ग्राम विकास व ग्राम पंचायत अधिकारी को कोई जिज्ञासा थी तो उन्हें बताते। सोमवार को उन्होंने वार्ता के लिए इनको बुलाया। डीएम ने कहा कि जो दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
संपत्ति की जांच हो : भूपेंद्र पाल
विश्व दलित परिषद के अध्यक्ष भूपेंद्र पाल सिंह ने कहा कि ग्राम विकास अधिकारियों की संपत्ति की जांच जरूर होनी चाहिए। कई जगहों पर नियुक्ति के दौरान उसी गांव में 60 बीघा जमीन खरीद ली है। उन्होंने तमाम मोटे घोटाले कर रखे हैं। डीएम जो इनकी जांच करा रहे हैं वह सही है। इस्तीफे की धमकी देकर ये जांच से बचने की कोशिश कर रहे हैं। इनकी जांच अवश्य होनी चाहिए। बड़े घोटाले जांच के बाद सामने आएंगे।
कुछ ग्राम पंचायत अधिकारी तो चैक बुक भी ग्राम प्रधानों से साइन करा कर अपने पास रखते हैं। एक ग्राम पंचायत अधिकारी ने जहानाबाद पंचायत में नियुक्ति के दौरान 40 बीघा कृषि भूमि खरीदी है। जब उसका दाखिल खारिज के लिए फाइल नगीना गई तो तहसीलदार ने भी दाखिल खारिज करने से मना कर दिया।