औद्योगिक इकाई भी देगी जिला पंचायत को टैक्स
बिजनौर। जिले की औद्योगिक इकाई जिला पंचायत को कोई टैक्स नहीं देती थी। ग्रामीण क्षेत्रों में इकाई होने का हवाला देकर ये टैक्स देने से हाथ खड़े कर देेती थीं। सरकार के फैसले के बाद अब ये इकाइयां टैक्स देने को मजबूर होंगी। जिला पंचायत के क्षेत्र में छोटी-बड़ी एक हजार से ज्यादा इकाइयां आती हैं।
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में उद्योग बंधु की बैठक में औद्योगिक क्षेत्रों में यूपीएसआईडीसी व जिला पंचायत द्वारा वसूले जाने वाले दोहरे कराधान की समस्या के निराकरण में निर्णय लिया गया कि जिला पंचायत की सीमा के भीतर आने वाले औद्योगिक क्षेत्र से वसूले जाने विभिन्न यूजेज चार्ज, एक अलग खाते में जाम किए जाएं। 60 प्रतिशत धनराशि का उपयोग औद्योगिक क्षेत्र के भीतर नागरिक सुविधा की पूर्ति के लिए किया जाए। 40 प्रतिशत धनराशि का उपयोग औद्योगिक क्षेत्र से बाहर किया जाए। सरकार के इस निर्णय से जिला पंचायत के अधिकारी गदगद हैं। जिले में छोटे से बड़ी एक हजार से ज्यादा औद्योगिक इकाइयां हैं। इनमें से कोई भी इकाई जिला पंचायत को टैक्स नहीं देती है।
पिछले दिनों जिला पंचायत की ओर से कुछ इकाइयों पर 22 लाख का टैक्स लगाया गया तो उद्यमी मुख्यमंत्री के पास पहुंच गए। कहा कि उनकी इकाइयां ग्रामीण क्षेत्र में हैं। वह टैक्स नहीं दे सकते। मुख्यमंत्री ने उद्यमियों से कहा था कि ग्रामीण क्षेत्र में जब जिला पंचायत सड़क बनवा सकती है तो औद्योगिक इकाइयां टैक्स क्यों नहीं दे सकतीं। इसके बाद भी जिले की इकाइयों ने टैक्स नहीं दिया था। सात लाख रुपये बड़ी मुश्किल से जमा किए थे। जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी श्याम बहादुर शर्मा के मुताबिक कोई भी इकाई टैक्स नहीं देती थी। अब सरकार के निर्णय से ये टैक्स देंगी। इससे जिला पंचायत को फायदा होगा। इस पैसे से विकास कार्य कराए जा सकेंगे।