बिजनौर/नूरपुर। कस्बे के एसआर हेल्थकेयर से डॉक्टरों ने नवजात को बेच दिया था। शिकायत के 11 दिन बाद स्वास्थ्य विभाग ने सोमवार को कार्रवाई करते हुए अस्पताल को सील कर दिया है। टीम को अस्पताल में सर्जरी करने के सबूत मिले हैं।
नूरपुर स्थित एसआर हेल्थकेयर आयुर्वेदिक एवं यूनानी कार्यालय में डॉ. जावेद के नाम से पंजीकृत था। यहां सिर्फ डॉक्टर को परामर्श देने का अधिकार था। लेकिन, नियमों की अनदेखी कर यहां सर्जरी भी की जा रही थी। अगर, यहां से बच्चा चोरी नहीं होता तो बीएएमएस डॉक्टर द्वारा सर्जरी करने की पोल नहीं खुलती। डॉ. राजेंद्र विश्वकर्मा ने बताया कि सीएमओ कार्यालय में अस्पताल कोई पंजीकरण नहीं था। जबकि, सर्जन एवं एलोपैथिक दवाई देने की गतिविधि चल रही थी। सोमवार को आयुर्वेदिक एवं यूनानी कार्यालय और स्वास्थ्य विभाग की टीम हॉस्पिटल पहुंची। यहां टीम को सर्जरी टेबल, दवाइयां, ड्रिप हेंगर सहित अन्य सबूत मिले। जिसके बाद टीम ने कार्रवाई करते हुए अस्पताल सील कर दिया। इस मौके पर आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. राकेश कुमार, डिप्टी सीएमओ डॉ. राजेंद्र प्रसाद विश्वकर्मा, डीपीएम सुरेश कुमार आदि मौजूद रहे।
यह था मामला
हीमपुर दीपा के गांव छोईया नंगली निवासी दंपती के नवजात शिशु को अस्पताल संचालक ने करीब साढ़े तीन माह पहले बेच दिया था। नवजात शिशु को माता पिता लेने के लिए इधर उधर भटकते रहे। लेकिन, कोई सफलता हाथ नहीं आई। जिसके बाद पीड़ित दंपती पूर्व सांसद भारतेंद्र सिंह से मिला। प्रसूता रुकमेश के ऑपरेशन की जांच कराने बात कही। बच्चा बेचने के मामले तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। अभी 12 अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी होना बाकी है।
जिले में बिना पंजीकरण चल रहे क्लीनिकों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। आगे भी कार्रवाई जारी रहेगा। अप्रशिक्षित डॉक्टर अपने क्लीनिक बंद कर दें।
डॉ. कौशलेंद्र सिंह, सीएमओ, बिजनौर