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Bijnor News: मोटाढाक में कहर न बरपा दे मालन नदी का रौद्र रूप

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नजीबाबाद। सीमांत ग्राम पंचायत मोटाढाक और चतरुवाला के ग्रामीणों को बरसात आते ही मालन नदी के रौद्र रूप से होने वाली तबाही का खतरा सताने लगता है। तटबंध और सुरक्षा दीवार बनाने का आश्वासन हर साल मिलता है फिर कागजों तक सीमित हो जाता है।
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उत्तराखंड के कोटद्वार का बीएल मार्ग गांव को उत्तर प्रदेश से जोड़ता है। क्षेत्र से मालन नदी गुजरती है। बरसात में पहाड़ों पर वर्षा से मालन नदी जब उफनाती है तब मोटाढाक और चतरुवाला के ग्रामीणों की सांसें उखड़ने लगती हैं।
कोटद्वार उत्तराखंड में करीब दो वर्ष पूर्व मालन नदी के विकराल रूप से क्षेत्र का बड़ा पुल धराशायी हुआ था। मालन नदी ने मोटाढाक से नजीबाबाद के कछियाना क्षेत्र तक तबाही मचाई थी। मोटाढाक की कृषि भूमि और फसल को भारी नुकसान पहुंचा था।
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गांव मोटाढाक निवासी नीरज भट्ट बताते हैं मोटाढाक से चतरुवाला तक लगभग तीन किलोमीटर मार्ग नदी के उफनाने से खस्ताहाल हो चुका है। लोनिवि और प्रशासन की उदासीनता से ग्रामीण कष्ट भरे आवागमन के लिए विवश हैं।
मोटाढाक के अंकुश नेगी बताते हैं कि बाढ़ जैसी स्थिति से वन संपदा को भारी खतरा पैदा होता है। एक पेड़ मां के नाम से पौधरोपण योजना मालन नदी से प्रभावित हो सकती है।
बोक्सा जनजाति बाहुल्य गांव चतरूवाला निवासी अमित असवल का कहना है कि गांव के नजदीक से नदी बहती है। हर वर्ष कृषि भूमि और आसपास का क्षेत्र प्रभावित होता है। यदि तटबंध और सुरक्षा दीवार नहीं बनी तो कभी भी गांव का अस्तित्व और ग्रामीण खतरे में पड़ सकते हैं।

मालन नदी से होने वाली तबाही को रोकने के लिए वन विभाग और बाढ़ नियंत्रण एवं सिंचाई खंड अफजलगढ़ की ओर से तटबंध और सुरक्षा दीवार बनाने का आश्वासन कागजों तक सीमित हो जाता है। तटबंध और सुरक्षा दीवार के अभाव में मोटाढाक -चतरूवाला संपर्क मार्ग जलमग्न हो जाता है। कृषि भूमि और फसल को मालन का रौद्र रूप हर वर्ष बहा ले जाता है, आवागमन भी ठप हो है।
-सागर बडोला, ग्राम पंचायत प्रशासक, मोटाढाक-नजीबाबाद
मोटाढाक -चतरुवाला की समस्या के संबंध में क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति का अध्ययन कर आरक्षित वन क्षेत्र में तटबंध बनाने की मांग के लिए उच्चाधिकारियों से संपर्क कर प्रभावित कदम उठाए जाएंगे। -सचिन शर्मा, वन क्षेत्राधिकारी, नजीबाबाद
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