बिजनौर। उफनती गंगा की लहरों और तटबंध के टूटने का डर अब नहीं रहेगा। दरअसल तटबंध को एसीबीएम तकनीक से मजबूत बनाया जाएगा, जिस पर 40 करोड़ रुपये की लागत आनी है। हालांकि इस परियोजना को वित्तीय स्वीकृति मिलने का इंतजार है।
बिजनौर में गंगा बैराज के साथ ही साल 1984 में 11 किलोमीटर लंबे तटबंध का निर्माण किया गया था। तब से लेकर अब तक यह तटबंध गंगा की लहरों का सामना करता रहा मगर इस बरसात में गंगा की धारा ने रुख बदला तो तटबंध पर खतरा मंडाराने लगा। सितंबर के महीने में तटबंध को टूटता देख सिंचाई विभाग के साथ साथ पूरा प्रशासनिक अमला घबराया, हालांकि चमत्कारिक रूप से वह घड़ी टली तो दिन-रात एक करते हुए तटबंध को बचाया गया था। एक किलोमीटर की दूरी में तटबंध पूरी तरह से कट गया था, मगर कटान के साथ साथ चल रहे राहत कार्य के चलते धारा तटबंध की सीमा को लांघ नहीं सकी।
इस मंजर के बाद तटबंध को और अधिक मजबूत बनाने की जरूरत समझी गई। इसके लिए परियोजना बनाकर शासन को भेज दी गई थी। परियोजना में एसीबीएम तकनीक के इस्तेमाल की बात कही गई। सीमेंट और कंक्रीट के जरिए तटबंध को मजबूत बनाया जाएगा। शासन से इस परियोजना को स्वीकृति मिल चुकी थी, अब वित्तीय स्वीकृति मिलना बाकी है।
परियोजना को वित्तीय स्वीकृति मिलने का इंतजार है। इसी महीने स्वीकृति मिली तो मार्च में चालू कर दिया जाएगा। जिसे बरसात से पहले पूरा करना है।...बृजेश मौर्य, अधिशासी अभियंता, मध्य गंगा नहर खंड पांच