बिजनौर। पोलियो को जड़ से खत्म करने के लिए सभी जतन किया गए। इसका फायदा भी हुआ। बिजनौर 16 साल पहले साल 2009 में पोलियो मुक्त घोषित हुआ। लेकिन, अभी इसको लेकर सतर्कता बरती जा रही है। इस साल एएफपी (तीव्र शिथिल पक्षाघात) के 90 केस मिल रहे हैं। जांच में किसी में पोलियो का वायरस नहीं मिला।
विश्व पोलियाे दिवस आज मनाया जा रहा है। पोलियो की रोकथाम के लिए पांच साल तक बच्चों और पोलियो रोधी वैक्सीन लगाई जा रही है। ऐसे में विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से एएफपी (तीव्र शिथिल पक्षाघात) मरीजों पर नजर रख रहा है। इस साल जनवरी से अब तक 90 एएफपी केस मिले हैं।
सूचना मिलते ही टीम मरीज के स्टूल का सैंपल लेने और जानकारी लेने पहुंच रही है। इन मरीजों में तेज बुखार, सिर दर्द जैसे लक्षण मिले थे। हालांकि किसी भी मरीज में पोलियो का वायरस नहीं मिला। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार बिजनौर में पोलियो का आखरी मरीज नवंबर 2009 में नजीबाबाद ब्लॉक में मिला था। इसके बाद से किसी भी मरीज में पोलियो की पुष्टि नहीं हुई है।
साल 2024 में मिले एएफपी के 174 केस : बिजनौर में साल 2024 में एएफपी के 174 केस मिले। सभी मरीजों की जांच की गई। मगर किसी में भी पोलियो के वायरस की पुष्टि नहीं हुई। सामान्य तौर पर किसी अन्य बीमारियों की वजह से उन्हें एएफपी हुआ है। इसके अलावा 2023 में करीब 130 और साल 2022 में 79 केस मिले हैं।
दिसंबर 2024 में चला था पोलियो अभियान : स्वास्थ्य विभाग की ओर से दिसंबर 2024 में पोलियो अभियान चला था। टीम ने घर-घर जाकर बच्चों को पोलियोरोधी दवाई पिलाई। इस बार बिजनौर को पोलियो अभियान से बाहर रखा है।