बिजनौर। भागदौड़ वाली जिंदगी और बदलती जीवनशैली सेहत के लिए नासूर बनती जा रही है। दरअसल कम समय में बेहतर करने की चाहत मौत के मुंह तक धकेल रही है। हार्टअटैक आने के मामले इस बात को तस्दीक करने के लिए काफी हैं। यह खतरा बुजुर्गों तक ही सीमित ही नहीं रहा बल्कि युवाओं में अधिक देखने को मिल रहा है।
मेडिकल अस्पताल के चिकित्सकों ने बताया कि बदलती जीवनशैली, मानसिक तनाव, अनियमित खानपान और नींद की कमी हार्ट अटैक का मुख्य कारण बन रही है। कई बार लोगों को यह भी पता नहीं चल पाता कि उन्हें हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज है, जो हृदय पर सीधा असर डालते हैं।
चिकित्सकों का कहना है युवाओं में इसका मुख्य कारण शारीरिक क्षमता से अधिक कार्य करना भी है। व्यायाम, पढ़ाई, नींद या खेल का एक समय निर्धारित होता है। इसमें कुछ ज्यादा करना ही प्राणघातक साबित हो रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि जीवन में हर किसी को अपने स्तर पर तनाव है, इसी तनाव के बीच हर कोई बेहतर करना चाहता है। काम अथवा तनाव को खुद पर हावी न होने दें।
हार्ट अटैक, हार्ट फेल में अंतर : शरीर की आवश्यकतानुसार हार्ट द्वारा पर्याप्त रक्त न दे पाना हार्ट फेल कहा जाता है। वहीं रक्त को पहुंचाने वाली धमनियों में रुकावट से ऑक्सीजन प्रभावित होना हार्ट अटैक है ।