गोशाला में आकर स्वस्थ हो गया निराश्रित गोवंश
बिजनौर। निराश्रित गायों को रखने के लिए बनाई गई अस्थायी गोशाला पूरे प्रदेश के लिए मॉडल बन गई है। यहां गायों को चरने के लिए भेजा जाता है और उनके स्वास्थ्य का भी पूरा ध्यान रखा जाता है। इसके सुखद परिणाम सामने आए हैं। गोशाला में 121 में से 65 गाय गाभिन हैं। वर्तमान में किसी बड़ी डेयरी में गायों की गर्भ धारण की इतनी क्षमता नहीं रह गई है। इस प्रयोग से पशुपालन विभाग के अधिकारी भी गदगद हैं।
निराश्रित गायों को आश्रय देने के लिए शहरों में कान्हा पशु आश्रय स्थल बनाए गए हैं। गांवों में अस्थायी गोशाला बनाई गई हैं। स्योहारा क्षेत्र के गांव अमीनाबाद में बनी अस्थायी गोशाला में 305 पशु हैं। इनमें 121 गाय तीन साल से अधिक आयु की हैं। यानि ये गाय गर्भधारण करने योग्य हैं। गोशाला के सभी गोवंश को चरने के लिए रामगंगा के वन क्षेत्र में भेजा जाता है। आमतौर पर जहां गोशालाओं में गोवंश के भूखे रहने की शिकायत आती हैं, ऐसे में अमीनाबाद की गोशाला एक मिसाल बनी है। यहां पर रहने वाले गोवंश न केवल पूरी तरह से स्वस्थ हैं बल्कि 121 में से 65 गाय गाभिन भी हो चुकी हैं। ये सभी गाय गोशाला में आकर ही गाभिन हुई हैं। जिले की बड़ी बड़ी डेयरी में भी गायों की गर्भ धारण करने की क्षमता में गिरावट आई है। लेकिन यहां पर रहने वाली आधी से अधिक गायों के गाभिन होने से सभी हैरान हैं।
मुख्य पशु चिकित्सक डॉ. भूपेंद्र सिंह के अनुसार गायों को चरने के लिए जंगल में भेजा जाता है। चलने और चरन से गायों की कसरत होती है। इसके अलावा गाय जंगल में हर प्रकार की घास खाती हैं। इनमें कई औषधीय गुण वाली भी होती हैं। इससे गायों के शरीर में सभी पोषक तत्वों की पूर्ति होती है। अगर किसी गाय को कोई छोटी मोटी बीमारी है तो वह भी सभी प्रकार की घास चरने से दूर हो जाती है। गायों के स्वास्थ्य का पशु चिकित्सकों द्वारा पूरा ध्यान रखा जा रहा है। गाभिन गायों का भी यहां पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
चारे के लिए 30 रुपये प्रतिदिन देती है सरकार
एक गोवंश के एक दिन के चारे के लिए 30 रुपये दिए जाते हैं। एक व्यस्क गोवंश के लिए दिन में चार किलो भूसा पर्याप्त होता है। लेकिन कभी कभी इससे पशुओं का पेट नहीं भर पाता है। ऐसे में गोवंश के लिए चराने की व्यवस्था बहुत कारगर साबित हो रही है। बड़ी डेरियों पर पशुओं का बहुत ध्यान रखा जाता है। वहां उनको खल, चोकर के अलावा मिनरल मिक्सचर आदि खिलाए जाते हैं। गर्भधारण की क्षमता बढ़ाने के लिए दवाई भी खिलाई जाती हैं। इसके बाद भी ये पशुओं में बांझपन बढ़ रहा है। ऐसे में अमीनाबाद में गोवंश 53 प्रतिशत गाय गाभिन होना एक सुखद परिणाम है।
दूसरे भी करें अनुसरण : सीडीओ
सीडीओ प्रवीण मिश्र के अनुसार अमीनाबाद गांव की गोशाला में गोवंश का बहुत ध्यान रखा जा रहा है। यह सभी के लिए एक प्रेरणा है। सभी गोशाला वाले गोवंश का अच्छे से ध्यान रखें। अमीनाबाद जैसी पहल को दूसरे गांवों में बनी गोशालाओं में भी कराने का प्रयास किया जाएगा।