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बढ़ता रहा शहर...सीमित ही रहा पालिका का दायरा

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बढ़ता रहा शहर... सीमित ही रहा पालिका का दायरा
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बिजनौर। शहर की आबादी बढ़ती रहीं और मकान बढ़ते रहें, रास्ते और बाजार संकरे होते रहें साथ ही समस्याएं बढ़ती रहीं। कभी शक्ति चौराहे से आगे जंगल हुआ करता था। अब चक्कर रोड से भी शहर बाहर निकल चुका है। 1984 में बनी बिजनौर नगर पालिका में सब कुछ अनियिोजित तरीके से होता रहा। करीब सौ साल बाद 1984 में नगर पालिका की सीमा विस्तार का पहला प्रस्ताव भेजा गया। इसके बाद भी प्रस्ताव भेजे जा रहे, लेकिन सीमा विस्तार मंजूरी 2020 में मिल पाई।
पालिका की पुरानी आबादी 93392 दर्ज है। अब 13 गांव और शामिल होने से 78363 की आबादी पालिका के दायरे में आ गई है। पुराने शहर में केवल 17 हजार मकान हुआ करते थे अब पंद्रह हजार और मकान पालिका क्षेत्र में शामिल हुए हैं। इससे पहले शहर का विस्तार होता रहा, लेकिन शहरीकरण को कोई ताल्लुक नहीं रहा। शहर के चारों तरफ लगने वाली ग्राम पंचायतों की जमीन में कॉलोनी बसती रही। शहर का प्रतिष्ठित स्कूल सेंट मैरीज भी चक्कर रोड पर है। यह स्कूल अब सीमा विस्तार के बाद ही पालिका के क्षेत्र में शामिल हो चुका है।
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3.65 से 11.70 वर्ग किलोमीटर हो गया शहर का दायरा
पहले बिजनौर शहर का क्षेत्रफल 3.65 वर्ग किलोमीटर हुआ करता था। साल 2020 तक भी नगर पालिका बिजनौर की सीमा भी यही बनी रही। हालांकि नवंबर 2020 में पालिका के सीमा विस्तार को मंजूरी मिल गई। जिसके बाद चक्कर रोड तक पालिका की सीमाएं तय हो गई। 7.65 वर्ग किलोमीटर एरिया और पालिका की सीमा में आ गया। अब शहर का क्षेत्रफल 11.70 वर्ग किलोमीटर हो चुका है।
लगातार बढ़ रहे अस्पताल
शहर बढ़ने के साथ साथ विकास हुआ तो अस्पतालों की संख्या में भी इजाफा हो गया। नए शहर में छोटे बड़े बीस नर्सिंग होम खुल चुके हैं। नगीना रोड, नजीबाबाद रोड और मंडावर रोड पर सबसे अधिक अस्पताल बने हैं। अब पालिका विस्तार से ये भी शहर के दायरे में आ गए हैं। छह बैंक्वेट हॉल भी पालिका क्षेत्र में शामिल हो गए हैं।
नए इलाकों में पहुंच रहे बाजार
चक्कर रोड पर अब रिलायंस का रिटेल मॉल खुल चुका है। इसके अलावा शक्ति चौराहे से लेकर नजीबाबाद रोड पर चक्कर चौराहे तक भी पांच से अधिक शॉपिंग मॉल खुल चुके हैं। बाजार भी शहर की तंग सड़कों से निकलकर बाहर पहुंच रहा है।
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अतिक्रमण और सड़कों के चौड़ीकरण की जरूरत
शहर की बड़ी समस्या की बात करें तो यहां पर अतिक्रमण की समस्या का आज ातक समाधान नहीं हुआ है। इसके अलावा सड़कों के चौड़ीकरण को लेकर भी कोई ठोस रणनीति नहीं बनी है। शास्त्री चौक से जजी चौक के बीच डिवाइडर तो बने, लेकिन इन्हें योजनाबद्ध तरीके से पूरा नहीं किया जा सका।
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