फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शासन ने सरकारी जमीन की बिक्री की जांच के लिए बनाई समिति

विज्ञापन
विज्ञापन
नदी तालाब की भूमि बेचने के मामले की जांच होगी
विज्ञापन

बिजनौर। जिले के 12 गांवों, नदी तालाब व जंगल की भूमि को गलत तरीके से बेचने के मामले की जांच शासन स्तर से गठित कमेटी जांच करेगी। एक माह में जांच करके अपनी रिपोर्ट शासन को देगी। नगीना के एसडीएम के आशुलिपिक किशनचंद मामले को कई साल से उठा रहे हैं। नगीना के सांसद गिरीशचंद ने भी मुख्यमंत्री से मिलकर मामले को उठाया था।
नगीना एसडीएम के आशुलिपिक किशन चंद ने सबसे पहले तीन अक्तूबर 2019 को डीएम से शिकायत करके कहा था कि नगीना तहसील के गांव तेलीपाड़ा, जहानाबाद, राजपुर कोट समेत 12 गांव में खो व सूखरो नदी समेत जंगल के अलावा तालाब की भूमि को लोगों ने कागजों में अपने नाम दर्ज करा लिया है। तहसीलदार के अलावा तहसील का बाकी स्टाफ इन जमीनों का दाखिल खारिज करने मेें लगा है। एसडीएम राजस्व संहिता की धारा 80 के तहत इन जमीनों को आबादी में दर्शा रहे हैं। कोर्ट भी इस पर रोक नहीं लगा रहा है। किशनचंद ने कमिश्नर समेत कई उच्च अधिकारियों से इसकी शिकायत की और मुख्यमंत्री को भी शिकायत भेजी। जिला स्तर पर अधिकारियों ने जांच करके रिपोर्ट शासन को भेज दी। बसपा के नगीना के सांसद गिरीशचंद ने भी मुख्यमंत्री से मिलकर मामला उठाया था। अब शासन स्तर से इसकी जांच के लिए कमेटी गठित कर दी गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

उत्तर प्रदेश राजस्व विभाग के अनुसचिव घनश्याम चतुर्वेदी ने अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार को भेजे पत्र में कहा कि बिजनौर की नगीना तहसील के गांव तेलीपाड़ा, जहांनाबाद व राजपुर कोट में ग्रामीणों द्वारा जंगल, नदी व नाले की जमीन को लोगों के नाम दर्ज कर बेचने का आरोप लगाया गया था। इस मामले की जांच डीएम बिजनौर ने एडीएम प्रशासन की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी बनाकर कराई है। यह प्रकरण जटिल व विषमतापूर्ण है। इसलिए इस प्रकरण की विस्तृत जांच के लिए शासन स्तर पर कमेटी बनाई गई है। कमेटी में राजस्व परिषद के आयुक्त व सचिव को अध्यक्ष, डीएम बिजनौर, संयुक्त संचालक चकबंदी व डीएफओ बिजनौर को सदस्य बनाया गया है। समिति किसी भी अधिकारी किसी भी अधिकारी व कर्मचारी का सहयोग लेने के लिए स्वतंत्र होगी। समिति एक महीने में जांच करके आख्या शासन को प्रस्तुत करेगी। शिकायकर्ता किशन चंद के मुताबिक अगर शासन जिला स्तर पर हुई जांच से संतुष्ट होता तो शासन स्तर से जांच क्यों कराई जाती । शासन स्तर से जांच होने पर अब इस मामले में इंसाफ मिलने की उम्मीद है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें