धामपुर। बड़ी मंडी स्थल पालिका अधिकारियों की घोर उपेक्षा के कारण बदहाल पड़ा है। ईंटों का बिछा फर्श टूटा पड़ा है। कई स्थानों पर कीचड़ युक्त बरसात का पानी जमा है। अधिक बरसात होने पर पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था भी नहीं है, जिससे मंडी परिसर में कई फीट पानी जमा होने से लोगों को आने-जाने व कारोबार को करने में भारी दिक्कत होती है। सब्जी बाजार ठप हो जाता है। कई बार शिकायत के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई। मंडी की अधिकांश जमीन पर लोगों के अवैध कब्जे हैं। लोगों ने प्रशासन से जल्दी बड़ी मंडी स्थल को अतिक्रमण मुक्त कर सुंदर बनाने की मांग की है।
शिक्षक विनोद कुमार सिंह का कहना है कि धामपुर का बड़ी मंडी स्थल कारोबार की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। पहले यहां पर गुड़ मंडी संचालित होती थी जो अब बंद हो गई है। कृषि उत्पादन मंडी समिति का कार्यालय भी यहीं पर एक प्राइवेट भवन में दूसरी मंजिल पर चलता है। जमीन पर अधिकांश लोगों के अवैध कब्जे हैं।
सुशील कुमार शर्मा का कहना है कि बरसात के दिनों में कई फीट पानी भर जाने से बड़ी मंडी परिसर तालाब बन जाता है। बड़ी मंडी में सड़क की दूसरी तरफ अशोक स्तंभ बना है, जिसकी सुंदरता पर किसी का कोई ध्यान नहीं है। 15 अगस्त या 26 जनवरी को ही नागरिकों की ओर से साफ-सफाई की जाती है। अन्य दिनों में कोई ध्यान नहीं देता।
सब्जी विक्रेता कमल सैनी का कहना है कि बड़ी मंडी में कोई सरकारी नल नहीं है। पहले था जो अब खराब पड़ा है। पीने के शुद्ध पानी की भी कमी है। सफाई व्यवस्था दुरुस्त न रहने से गंदगी फैली रहती है।
हरपाल सिंह सैनी का कहना है कि बड़ी मंडी बदहाल है। सरकार की ओर से ग्रामीण आजीविका मिशन तहत मंडी में विदुर ब्रांड उत्पाद की दुकान खुलनी थी। जमीन को चिह्नित कर लिया गया था। लेकिन स्वार्थ के चलते व्यापारियों ने विरोध कर दुकान को खुलने नहीं दिया था।
ईओ रवि शंकर शुक्ला का कहना है कि नगर पालिका बड़ी मंडी को ऐतिहासिक तौर पर बेहतर बनाने का प्रयास करना चाहती है। लेकिन कुछ व्यापारी अवरोध पैदा कर रहे हैं। इस बाबत में व्यापारी से वार्ता चल रही है।
पालिका अध्यक्ष चौधरी रवि कुमार सिंह का कहना है कि अधिकांश व्यापारियों ने जमीन पर अवैध कब्जा कर रखा है। इस मामले को पालिका की ओर से कोर्ट में विवाद चल रहा है। जल्दी ही डिसीजन होने वाला है। कोर्ट का जो भी आदेश होगा, नगर पालिका द्वारा अमल में लाया जाएगा।