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डेढ़ किमी नाले को 17 हिस्सों में बांटकर निकाला टेंडर

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बिजनौर के कस्बा झालू में जांच के दायरे में फंसा घटिया सामग्री से बना नाला। - फोटो : BIJNOR
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डेढ़ किमी नाले को 17 हिस्सों में बांटकर निकाला टेंडर
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बिजनौर। झालू में नगर पंचायत की ओर से बनाया जा रहा नाला जांच के दायरे में फंस गया है। नाला निर्माण में लगाई जा रही दस ईंटों को सील कर जांच के लिए लैब भेज दिया गया है। एसडीएम सदर ने दावा किया कि प्रथम दृष्टया ही सोयम दर्जे की ईंटों के इस्तेमाल किया जाना सामने आ चुका है। नाला निर्माण समेत अन्य निविदाओं की 30 फाइलों को एसडीएम ने अपने कब्जे में ले लिया है। टेंडर प्रक्रियाओं की सभी बिन्दुओं पर जांच की जा रही है।
बृहस्पतिवार को एसडीएम सदर विक्रमादित्य सिंह मलिक ने अपनी मौजूदगी में नाले में लगाई जा रही ईंटों को सील कराया गया। जिन्हें लोक निर्माण विभाग की लैब में जांच के लिए भेज दिया है। बता दें कि झालू नगर पंचायत नहटौर रोड पर मक्कावाला तालाब के पास डेढ़ किलोमीटर लंबे नाले का निर्माण करा रही है। इस नाले की शिकायत हुई तो बुधवार को एसडीएम मौके पर पहुंच गए। उन्होंने दो ईंटों को आपस में बजाया तो ईंट टूट गई। मौके पर ही जानकारी मिली कि नाले की दीवार नीचे की तरफ नौ ईंच चौड़ाई की है, जबकि ऊपर के हिस्से में दिखाने के लिए 14 इंच मोटी दीवार की चिनाई कर दी गई।
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कागजों पर 17 हिस्सो में बांटा गया नाला
नाला निर्माण शुरू होने से पहले ही भ्रष्टाचार की नींव रखी जा चुकी थी। चर्चा है कि डेढ़ किलोमीटर लंबे नाले को कागजों पर 17 हिस्सों में बांट दिया गया। एक हिस्से की अनुमानित लागत करीब पांच लाख रुपये बताई जा रही है। 17 हिस्सों में बांटकर ऑनलाइन निविदा से इसे बाहर कर लिया गया। फिर चहेते ठेकेदारों से नाला बनवाने का खेल शुरू हुआ। झालू में ही रसूलपुर रोड पर भी सात सौ मीटर लंबे नाले का निर्माण कराया जा रहा है। आरोप है कि उस नाले को भी दो हिस्सों में बांटकर टेंडर निकाला गया है। इस नाले की भी प्रशासन से शिकायत की गई है।
फाइलों पर नहीं हैं अवर अभियंता के हस्ताक्षर
झालू के रहने वाले संजीव कुमार राणा ने डीएम को दिए शिकायती पत्र में आरोप लगाया कि 15 वें वित्त आयोग से कराए जाने वाले निर्माण कार्यों की निविदा आमंत्रित की गई हैं। इन निविदाओं की तकनीकी बिड नहीं खोली गई। टेंडर की किसी भी फाइल पर अवर अभियंता के हस्ताक्षर नहीं हैं। बिना हस्ताक्षर कराए ही चहेते ठेकेदारों को कार्यादेश देने का आरोप लगाया।
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--------कोट
नाले में लगाई जा रही दस ईंट सील करने के बाद लोक निर्माण विभाग की लैब में जांच के लिए भेजी गई हैं। प्रथम दृष्टया ही ईंट सोयम दर्जे की लग रही है। नगर पंचायत की टेंडर से जुड़ी बीस से तीस फाइल लाई गई हैं, जिनकी जांच की जा रही है - विक्रमादित्य सिंह मलिक, एसडीएम सदर।
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