अफसरों के आदेशों में उलझे रहे शिक्षक-शिक्षिकाएं
बिजनौर। अफसरों के दो आदेश के फेर में काफी शिक्षक-शिक्षिकाएं उलझे रहे। परिषदीय स्कूलों में वार्षिक परीक्षाएं चल रही हैं और बृहस्पतिवार से यूपी बोर्ड परीक्षाएं भी शुरू हो गईं। बोर्ड परीक्षाओं में बेसिक शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है। मुख्य अध्यापकों ने अपनी परीक्षा कराने के लिए एक या दो शिक्षकों को रोक लिया। कार्यालय से शिक्षकों को रिलीव करने तथा स्कूल में बच्चों को देखते हुए रोकने के आदेश जारी हुए। इनको स्पष्ट करने के लिए शिक्षक देर रात तक इधर-उधर फोन करते रहे।
परिषदीय स्कूलों में मंगलवार से परीक्षाएं आरंभ हो गई। बृहस्पतिवार से यूपी बोर्ड परीक्षाएं भी शुरू हो गई हैं। बोर्ड परीक्षाएं संपन्न कराने के लिए कक्ष निरीक्षकों के रूप में करीब चार हजार बेसिक शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई। बोर्ड परीक्षा की ड्यूटी लगने से परिषदीय विद्यालयों में अपनी परीक्षा कराने को कहीं एक, तो कहीं दो शिक्षकों की ड्यूटी रह गई थी। बुधवार को परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों को परीक्षाएं कराने में परेशान रही। शाम को शिक्षकों के व्हाट्सएप ग्रुप पर अधिकारियों का बोर्ड परीक्षा के लिए रिलीव करने का आदेश जारी हुआ। साथ ही कार्रवाई की चेतावनी भी दे दी गई। इस मामले में शिक्षकों का प्रतिनिधिमंडल अधिकारियों से मिला था। बीएसए ने कहा कि परीक्षा कराने के लिए जितने शिक्षकों की जरूरत हो, उन्हें रोक कर बाकी को रिलीव करें।
उधार की कॉपियों पर दे रहे परीक्षा
परिषदीय विद्यालयों में हो रही परीक्षाओं के लिए स्कूल के बजट से ही उत्तर पुस्तिकाएं खरीदी जाती हैं। वर्तमान में अनेक विद्यालयों में बजट नहीं है, लेकिन परीक्षाओं के लिए शिक्षक उत्तर पुस्तिकाएं बाजार से उधार या काफी शिक्षक अपनी जेब से खरीदकर ला रहे है। कहीं-कहीं बच्चों की संख्या अधिक होने पर मोटी रकम खर्च हो रही है।
विद्यालयों में बच्चों की संख्या के सापेक्ष शिक्षकों को रोकर बाकी शिक्षक रिलीव किए गए हैं। उसके बाद बोर्ड ड्यूटी में न जाने वालों को रिलीव करने को निर्देश दिए गए हैं। उत्तर पुस्तिकाओं के लिए बजट होता है उसका पैसा स्कूलों के खातों में जाएगा
- जयकरन यादव, बीएसए