किसानों के आंदोलन से गर्मा रहा गन्ना मूल्य वृद्धि का मुद्दा
बिजनौर। किसानों के आंदोलन के बाद केंद्र और प्रदेश सरकार पर दबाव आने की बात कही जा रही है। गन्ने के दामों में वृद्धि होने के कयास लगने शुरू हो गए हैं। चीनी मिल के अफसर भी इस बार गन्ने के दामों पर दस से 15 रुपये वृद्धि होने की बात कह रहे हैं।
गन्ने का चालू पेराई सत्र एक महीने से ज्यादा समय से चल रहा है। पिछले साल का गन्ना भुगतान किसानों को अब तक नहीं मिला है। प्रदेश सरकार ने लखनऊ में गन्ना मूल्य निर्धारण के लिए चीनी मिल अफसरों व किसान नेताओं के साथ बैठक की थी। बैठक में किसानों ने गन्ना मूल्य 400 रुपये प्रति क्विंटल मांगा है तो चीनी मिल अफसरों ने रिकवरी कम निकलने का हवाला देते हुए गन्ना मूल्य न बढ़ाने की बात कही। आशंका थी कि इस बार भी गन्ना मूल्य नहीं बढ़ेगा।
हालांकि किसान संगठन गन्ना मूल्य 450 से 500 रुपये प्रति क्विंटल मांग रहे हैं। लेकिन पंजाब और हरियाणा के किसानों के समर्थन में बने माहौल से अब गन्ना मूल्य वृद्धि का मामला भी गर्मा जाएगा। प्रदेश सरकार ने 2017 में गन्ने की अगेती प्रजाति का दाम 325 व सामान्य प्रजाति का दाम 315 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया था। इससे पहले साल गन्ने की अगेती प्रजाति 315 व सामान्य प्रजाति 305 रुपये प्रति क्विंटल बिकी थी। प्रदेश सरकार ने गन्ना मूल्य में दस रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की थी। लेकिन 2017 के बाद गन्ना मूल्य में फूटी कौड़ी की भी वृद्धि नहीं की गई है। किसानों का कहना है कि गन्ने में लागत लगातार बढ़ती जा रही है। किसान हर हाल में गन्ना मूल्य में वृद्धि की मांग कर रहे हैं।
साल सामान्य अगेती
2007-08 110 115
2008-09 140 145
2009-10 165 170
2010-11 205 270
2011-12 250 260
2012-13 280 290
2013-14 280 290
2014-15 280 290
2015-16 280 290
2016-17 305 315
2017-18 315 325
2018-19 315 325
2019-20 315 325
2020-21 ---- ----
सरकार के निर्णय का होगा पालन
बिलाई चीनी मिल के गन्ना महाप्रबंधक परोपकार सिंह के अनुसार रिकवरी कम आने से मिलों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। चीनी भी सस्ती बिक रही है। फिर भी सरकार जो निर्णय लेगी उसका पालन किया जाएगा।