लगातार दूसरे साल गन्ने के दाम में नहीं बढ़ी फूटी कौड़ी
बिजनौर। जिले में गन्ने के दामों में लगातार दूसरे साल कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। किसान इस बार गन्ने के दामों में बढ़ोतरी की आस लगाए बैठे थे। लेकिन सरकार ने गन्ने के दामों में फूटी कौड़ी की भी वृद्धि नहीं की है।
गन्ना जिले के किसानों की प्रमुख फसल है। जिले में करीब दो लाख हेक्टेअर जमीन में गन्ने की फसल बोई जाती है। जिले के किसान चीनी मिलों को सवा तीन हजार करोड़ से अधिक का गन्ना हर साल बेचते हैं। पिछले दो साल से अर्ली प्रजाति के गन्ने का दाम 325 तथा सामान्य प्रजाति के गन्ने का दाम 315 रुपये प्रति क्विंटल था। इस साल गन्ने के दामों में कुछ वृद्धि होने की आस लगाई जा रही थी। किसानों का कहना था कि चीनी मिल इस बार गन्ने के रस से एथनॉल, एल्कोहल बना रही हैं। इसके अलावा विदेश भेजने के लिए रॉ शुगर भी बनाई जा रही है। वेस्ट यूपी में एक चीनी मिल गन्ने के रस से केवल एथनॉल ही बना रही है। इससे चीनी का उत्पादन कम होगा। साथ ही रॉ शुगर बनने से बाजार में चीनी की उपलब्धता कम होगी और चीनी को विदेशों में बाजार बढ़ेगा। इसे देखते हुए किसानों को लग रहा था कि सरकार इस साल गन्ने के दाम बढ़ा सकती है। किसान हालांकि गन्ने का भाव 450 रुपये प्रति क्विंटल तक मांग रहे थे, लेकिन उन्हें उम्मीद थी कि भाव में शायद 20 रुपये प्रति क्विंटल तो बढ़ ही जाएं। लेकिन सरकार ने शनिवार रात गन्ने मूल्य घोषित करके किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। गन्ने के दामों में फूटी कौड़ी की भी वृद्धि नहीं की गई है।
पिछले कुछ सालों का गन्ना मूल्य
साल सामान्य प्रजाति अर्ली प्रजाति
2007-08 110 115
2008-09 140 145
2009-10 165 170
2010-11 205 210
2011-12 240 250
2012-13 280 290
2013-14 280 290
2014-15 280 290
2015-16 280 290
2016-17 305 315
2017-18 315 325
2018-19 315 325
2019-20 315 325
नोट:गन्ने के दाम रुपये प्रति क्विंटल में है।
किसानों को खत्म करना चाहती है सरकार
भाकियू जिलाध्यक्ष दिगंबर सिंह के अनुसार किसानों को लागत का डेढ़ गुना मूल्य देने की बात कहने वाली भाजपा ने दो साल से गन्ना मूल्य में फूटी कौड़ी नहीं बढ़ाई है। सरकार किसानों को खत्म करना चाहती है। केवल पूंजीपतियों के लिए ही सरकार के पास धन है। खाद के रेट तीन साल से बढ़ रहे हैं लेकिन गन्ने में फूटी कौड़ी नहीं बढ़ाई गई।