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चीनी मिलों ने पिछले साल के बराबर मांगी सब्सिडी

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चीनी मिलों ने पिछले साल के बराबर मांगी सब्सिडी
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बिजनौर। विदेशों में बेची जा रही चीनी पर मिलों को लोकल के बाजार से भी कम कीमत मिल रही है। विदेशों को भेजी जा रही चीनी पर सरकार द्वारा सब्सिडी कम होने पर अब इस्मा ने केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखा है। चीनी पर दी जा रही सब्सिडी को लगभग पिछले साल के बराबर करने की मांग की है। पिछले साल के मुकाबले इस साल सब्सिडी करीब आधी दी जा रही है। अब विदेशों से चीनी की ओर मांग की जा रही है। इसे देखते हुए इस्मा ने भी चीनी की सब्सिडी बढ़ाने की मांग की है।
तीन साल से चीनी का बंपर उत्पादन हो रहा है। जिससे बाजार में आवक बढ़ी और चीनी के दाम कम होते चले गए। तीन साल पहले जो चीनी चार हजार रुपये प्रति क्विंटल बिकी थी, उसके दाम 2500 रुपये प्रति क्विंटल तक रह गए थे। ज्यादा बनी चीनी को सरकार विदेशों में भिजवा रही है। पिछले साल प्रति क्विंटल चीनी पर सरकार ने 11.44 रुपये सब्सिडी दी गई थी। लेकिन इस बार सब्सिडी को घटाकर 5.86 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया। देश में चीनी के न्यूनतम दाम 3100 रुपये प्रति क्विंटल हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीनी के दाम 2200 से 2300 रुपये प्रति क्विंटल ही हैं। कम कीमत पर चीनी बेचने के साथ ही सब्सिडी कम मिलने से चीनी मिलों को नुकसान हो रहा है। सब्सिडी को बढ़ाकर इस नुकसान की भरपाई की जा सकती है। इसके लिए इस्मा (इंडियन शुगर मिल एसोसिएशन) ने केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखा है। सब्सिडी कम से कम पिछले साल के बराबर या इससे अधिक करने की मांग की गई है। (संवाद)
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चीनी मिल बनी चीनी बची चीनी
बिजनौर 419080 147030
धामपुर 2026190 2026190
स्योहारा 1818135 1373832
चांदपुर 654925 42820
बिलाई 1507490 1164433
नजीबाबाद 503540 503540
बरकातपुर 1258932 549035
बुंदकी 1180260 1180260
बहादरपुर 1179500 1179500
योग 10548052 8166912
नोट : आंकड़े क्विंटल में हैं। गन्ना विभाग से लिए गए हैं।
लोकल से भी सस्ती बिक रही विदेश में चीनी
बरकातपुर चीनी मिल के संयुक्त अध्यक्ष नरपत सिंह के अनुसार चीनी मिलों को बहुत नुकसान उठाना पड़ रहा है। विदेश जो चीनी बेची जा रही है वह लोकल में बिकने वाली चीनी से भी सस्ती है। सरकार को चीनी पर सब्सिडी बढ़ानी चाहिए। इसके लिए इस्मा ने पत्र भी लिखा है।
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