कसक बरकरार, भाजपा को नहीं मिला ‘नगीना’
बिजनौर। भले ही सूबे में फिर से भगवा लहरा गया हो, लेकिन सीएम योगी की एक कसक बाकी रह गई। उन्हें विदुर की धरती से ‘नगीना’ नहीं मिल पाया। दरअसल, नगीना की लगातार हार पर सीएम योगी का दर्द उस वक्त छलक उठा था, जब उन्होंने स्वाहेड़ी में मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास किया। नगीना सीट पर भाजपा ने इस बार पूरे जोर लगाए। सीएम योगी खुद नगीना में चुनावी जनसभा को संबोधित करने पहुंचे। हार भी सम्मान जनक नहीं रही, यानि 27 हजार से अधिक मतों से बीजेपी हार गई।
नगीना सीट पर भाजपा ने रामलहर के दौरान 1991 में पहली बार जीत दर्ज कराई, उस वक्त ओमप्रकाश विधायक बने। इसके बाद 1998 में हुए उपचुनाव में लवकुश विधायक बने। इसके बाद नगीना सीट पर भाजपा फिर कभी अपना खाता नहीं खोल सकी। इसकी कसक सीएम योगी को भी रही। बता दें कि पिछले साल 21 सितंबर को सीएम योगी स्वाहेड़ी में मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास करने के लिए आए। जहां उन्होंने जनसभा को संबोधित करते हुए चुनावी शंखनाद किया। नगीना का जिक्र करते हुए बोले थे कि अगर नगीना से भाजपा का विधायक चुना गया होता तो तीन गुना विकास होता। बोले थे कि नगीना में चूक हुई थी, इस बार चूक नहीं होनी चाहिए। उस वक्त नूरपुर का जिक्र भी किया था।
सीएम योगी के नगीना का जिक्र करने के कारण माना जा रहा था कि अबकी बार भाजपा के लिए यह सीट खास रहेगी। जिसके चलते पूर्व सांसद डॉ. यशवंत सिंह को मैदान में उतारा गया। तमाम प्रयासों के बाद भी नगीना सीट पर भाजपा परचम नहीं लहरा सकी। नगीना सीट पर सपा के विधायक मनोज पारस तीसरी बार चुनाव जीते हैं। नगीना सीट सपा का मजबूत गढ़ बन चुकी है। इस गढ़ पर भगवा झंडा नहीं फहर पाया।