राज्य गुड़ महोत्सव अब छह मार्च को
बिजनौर। लखनऊ में प्रस्तावित दो दिवसीय गुड़ महोत्सव की तारीख बदलने से प्रतिभाग करने वाले निर्माताओं की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। अब गुड़ महोत्सव छह मार्च से शुरू होगा। महोत्सव में शामिल होने के लिए जैविक गुड़ निर्माताओं में उत्सुकता है। इसके लिए निर्माता सहायक चीनी आयुक्त के दफ्तर में जानकारी लेने आ रहे हैं।
दो दिवसीय राज्य गुड़ महोत्सव 27 मार्च से शुरू होना था। परंतु 27 फरवरी को रविदास जयंती होने से महोत्सव आयोजन की तारीख व स्थान दोनों बदल दिए गए हैं। सहायक चीनी आयुक्त डीपी मौर्य ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार अब महोत्सव छह मार्च व सात मार्च को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान विभूति खंड गोमतीनगर लखनऊ में होगा। बताया था कि पहले महोत्सव में प्रतिभाग करने के लिए छह गुड़ निर्माताओं का चयन हुआ था। परंतु महोत्सव में जैविक गुड़ निर्माता प्रतिभाग करने के लिए उत्सुक हैं, उनकी संख्या भी बढ़ सकती है। कुछ निर्माताओं के आवेदन विभाग को प्राप्त हो गए हैं। सूबे से 70 गुड़ निर्माताओं का चयन हुआ था। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से 18 इकाई थीं। इनमें बिजनौर जिले के छह गुड़ निर्माता हैं।
जैविक गुड़ पहली पसंद बना
जिले में जैविक गुड़ बनाने की शुरुआत आईआईटी में प्रोफेसर रहे डॉ. यशपाल सत्य ने की थी। हल्दौर ब्लॉक के गांव मोहनपुर चांदां नंगली निवासी डॉ. यशपाल ने अपनी पुस्तैनी जमीन में बोए गन्ने में केवल गोबर की खाद का इस्तेमाल किया था। उस समय उत्पादन लागत भी उन्हें नहीं मिली थी। धीरे-धीरे मांग बढ़ी, आज जैविक गुड़ लोगों की पहली पसंद बन गया है। जैविक गुड़ निर्माता शूरवीर सिंह, समरपाल सिंह बताते हैं कि जैविक गुड़ दिल्ली, गुजरात, आदि राज्यों समेत विदेशों में भी खूब पसंद किया जा रहा है। अब जिले में जैविक गुड़ काफी बनने लगा है। गुड़ महोत्सव जैसे आयोजनों से जैविक गुड़ को बढ़ावा मिलेगा।
पपड़ी गुड़ आहार विक्रेताओं को भाया
सहायक चीनी आयुक्त ने बताया कि जिले में बन रहे पपड़ी गुड़ पशु आहार विक्रेताओं के खूब भा रहा है। पपड़ी पशु आहार जैसे मुर्गी दाना, दुधारू पशुओं के खाने में इस्तेमाल होता है। पपड़ी गुड़ की गुजरात, पंजाब, राजस्थान आदि राज्यों में काफी मांग है। पपड़ी गुड़ केवल जिला बिजनौर में बनता है। गुड़ निर्माताओं को इसकी अच्छी कीमत मिल जाती है।