बिजनौर। जल्द ही आमनगढ़ में बाघों की सुरक्षा के लिए स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स तैनात की जाएगी। डीएफओ ने मुख्य वन संरक्षक को पत्र लिखकर इसकी मांग की है। इस यूनिट में पुलिस और पीएससी के जवान तैनात होंगे।
अमानगढ़ बाघों के लिए आरक्षित वन क्षेत्र हैं। करीब 9500 हेक्टेयर में फैले इस जंगल में 32 से ज्यादा बाघों का बसेरा है। वहीं पिछले तीन साल से पर्यटन भी इस जंगल के दीदार को आ रहे हैं। वहीं स्टाफ की बात की जाए तो यहां 35 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से वन रक्षक, वन दरोगा और वाचर समेत मात्र 13 ही तैनात हैं। ऐसे में बाघों और जंगल की सुरक्षा के लिए डीएफओ बिजनौर ने एक स्पेशल टाइगर प्रोक्टेक्शन फोर्स की एक यूनिट मांगी है। इसके लिए वन संरक्षक और मुख्य वन संरक्षक को पत्र लिखा गया है।
डीएफओ ज्ञान सिंह ने बताया कि अमानगढ़ में बाघों के साथ-साथ हाथी, चीतल, भालू, गुलदार जैसे जानवर भी हैं। इनकी सुरक्षा के लिए एक यूनिट एसटीपीएफ तैनात करने की तैयारी है। इससे जंगल और वन्य जीवों की सुरक्षा होगी।
- कार्बेट पार्क की रेंज थी अमानगढ़, बंटवारे में बिजनौर को मिला
अमानगढ़ रेंज कभी कार्बेट पार्क का ही हिस्सा हुआ करती थी। यूपी-उत्तराखंड बंटवारे के समय कार्बेट पार्क उत्तराखंड में चला गया। वहीं अमानगढ़ वन रेंज बिजनौर उत्तर प्रदेश के हिस्से में आ गई। इसका रकबा 9500 हेक्टेयर में है। इसमें करीब 8600 हेक्टेयर क्षेत्र टाइगर रिजर्व के तहत आता है। इसे वर्ष 2012 में टाइगर रिजर्व का दर्जा मिल चुका है।
- प्राकृतिक धरोहर का खजाना है अमानगढ़
अमानगढ़ के पास ही पीली बांध है, जहां पर सर्दियों में हजारों प्रवासी पक्षियों का बसेरा रहता है, जो खुद में एक बेहतरीन पर्यटक स्थल है। अमानगढ़ के जंगल में 32 बाघ हैं। इस बार हुई गणना में इनकी संख्या और बढ़ने की उम्मीद है। इसके अलावा यहां पर 100 से ज्यादा हाथी हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में भालू, गुलदार, पैंगोलिन, अजगर जैसे जीव भी दिखाई देते हैं। यहां पर चीतल, हिरण के दर्जनों की संख्या में झुंड दिखाई पड़ते हैं।
- अमानगढ़ एक नजर में
बाघ 32
गुलदार 45
हाथी 105
चिकारा 06
काला हिरन 50
सांभर 226
बारहसिंगा 37
भालू 9
मोर 1074