बिजनौर में घर-आंगन से विलुप्त होती जा रही गौरैया को बचाने और उनको संरक्षण देने के लिए वन विभाग ने पहली की है। वन विभाग विश्व गौरैया दिवस पर प्राइमरी स्कूलों में मानव निर्मित घोंसले देगा। इन घोंसलों में पक्षी रहेंगे। बच्चों को पक्षियों के प्रति जागरूक करने के लिए वन विभाग ने यह अभियान शुरू किया है।
पहले घर-आंगन में गौरैया को चहचहाते देखा जा सकता था। घर के आंगन में बिखरे गेहूं के दानों को चुगने के लिए गौरैया के झुंड के झुंड आ जाते थे। खेतों में तो गेहूं की फसल पकने के समय गेहूं के हर खेत में गौरैया के झुंड बिखरे पड़े गेहूं के दाना चुगते दिखते थे, लेकिन धीरे धीरे गौरैया विलुप्त होती जा रही है। गौरैया को बचाने के लिए अब वन विभाग ने पहल की है। वन विभाग पक्षियों का महत्व और उनको संरक्षण देने के बारे में बच्चों को जागरूक करेगा।
वन विभाग ने सोमवार को बिजनौर, चांदपुर, धामपुर, नजीबाबाद, नगीना और अमानगढ़ रेंज में प्राथमिक विद्यालयों में पक्षियों के लिए घोंसले बांटे जाएंगे। गौरैया आमतौर पर घरों में बने आलों में घोंसला बनाकर रहती है। लेकिन धीरे धीरे मकानों से आले लगभग खत्म हो गए हैं।
आम जनता में पक्षियों के प्रति अब प्रेम भी देखा जा रहा है। कई घरों की छतों पर सुबह के समय पक्षियों के लिए दाना डाला जाता है वऔरपानी रखा जाता है। सभी नागरिकों को पक्षियों को दाना पानी देने के लिए यह पहल करनी चाहिए। जिला वन अधिकारी डा.एम सेम्मारन के अनुसार पक्षी भी पर्यावरण का अभिन्न अंग हैं। हर प्राणी का अपना महत्व है। पक्षियों को सभी को संरक्षण देना चाहिए।