फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कांग्रेस का गढ़ रही नगीना सीट पर सपा बना चुकी किला, भाजपा-बसपा के लिए चुनौती

विज्ञापन
नगीना विधानसभा नक्शा। - फोटो : BIJNOR
विज्ञापन
कांग्रेस का गढ़ रही नगीना सीट पर सपा बना चुकी किला, भाजपा-बसपा के लिए चुनौती
विज्ञापन

रजनीश त्यागी
बिजनौर। नगीना विधानसभा सीट पर चुनाव इस बार कड़ा होने की उम्मीद है। सात बार जीत का रिकॉर्ड बनाने वाली कांग्रेस का गढ़ रहे नगीना में सपा का किला मजबूत हो चुका है। पिछले दो चुनाव लगातार जीत चुकी सपा कुल चार बार इस सीट पर जीत का परचम लहरा चुकी है। ऐसे में इस किले को भेदने के लिए भाजपा और बसपा भी पूरी ताकत झोंकने की तैयारी कर रही हैं। नगीना सीट पर दो बार जीत हासिल कर चुकी भाजपा इस बार किसी मजबूत चेहरे को टिकट दे सकती है। वहीं, बसपा इंजीनियर बृजपाल सिंह को पहले ही प्रत्याशी बनाकर मैदान में उतार चुकी है। बसपा अपना जीत का आंकड़ा बढ़ाकर तीन करने के लिए ताकत झोंकने का दावा कर रही है। सपा से इस सीट पर पूर्व मंत्री मनोज पारस को ही टिकट मिलने की संभावना है।
भाजपा की बात करें तो मेडिकल कॉलेज के उद्घाटन के समय नगीना की हार की कसक उनके भाषण में भी झलकी थी। इन सबके साथ इस सीट पर 1985 में आखिरी बार जीत का स्वाद चखने वाली कांग्रेस ने अपने खोए रुतवे को वापस पाने के लिए पूर्व मंत्री ओमवती की पुत्रवधू हेतरीता राजीव सिंह को प्रत्याशी बनाकर चुनावी मैदान में उतारा है। इस सीट पर इस बार चुनाव काफी रोमांचक होने की उम्मीद जताई जा रही है। एक नजर नगीना विधानसभा सीट
विज्ञापन

आजादी के बाद से साल 1974 तक बिजनौर की नगीना विधानसभा सीट कांग्रेस के लिए नगीना ही बनी रही। लगातार कांग्रेस के उम्मीदवार ही यहां से जीत दर्ज कराकर विधानसभा पहुंचते रहे। कांग्रेस का यह किला साल 1977 के चुनाव में जनता दल ने ढहा दिया था। हालांकि अस्सी के दशक में दो बार फिर कांग्रेस का कब्जा हुआ। भाजपा को सिर्फ राम लहर के वक्त और एक उपचुनाव में ही यहां जीतने का मौका मिल सका है। साल 1974 में नगीना सीट एससी वर्ग के लिए आरक्षित कर दी गई थी। इससे पहले तक यह सामान्य थी। आरक्षित होने के बाद साल 1974 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर कांग्रेस से गंगा देई ने जीत दर्ज कराई। साल 1977 में चुनाव हुए तो जनता दल के मंगलराम प्रेमी ने परचम लहराया। बता दें कि नगीना में भाजपा को पहली बार रामलहर में 1991 में जीत दर्ज कराने का मौका मिला था। उस वक्त भाजपा के टिकट पर ओमप्रकाश विधायक बने। बाद में साल 1998 में उपचुनाव हुए तो भाजपा से लवकुश विधायक बने। भाजपा इस सीट पर सिर्फ दो बार ही जीत सकी है। (संवाद)
विज्ञापन

नगीना सीट
मतदान केंद्र 215
बूथ 406
कुल मतदाता 346035
पुरुष मतदाता 183358
महिला मतदाता 162665
दिव्यांग मतदाता 2268
80 की उम्र पार वाले मतदाता 4776
क्षेत्र की पहचान-विदेशों में भी मशहूर काष्ठकला उद्योग।
समस्या- कताई मिल दो दशक बाद भी शुरू नहीं हुई।
---------
नगीना से अब तक बने विधायक
गोविंद सहाय 1957 कांग्रेस
गोविंद सहाय 1962 कांग्रेस
अतीकुररहमान 1967 कांग्रेस
अतीकुररहमान 1969 कांग्रेस
गंगा देई 1974 कांग्रेस
मंगलराम प्रेमी 1977 जनता दल
बिशन लाल 1980 कांग्रेस
ओमवती देवी 1985 कांग्रेस
रामेश्वरी 1989 बसपा
ओमप्रकाश 1991 भाजपा
सतीश कुमार 1993 जनता दल
ओमवती देवी 1996 सपा
लवकुश 1998 भाजपा उपचुनाव
ओमवती देवी 2002 सपा
ओमवती देवी 2007 बसपा
मनोज पारस 2012 सपा
मनोज पारस 2017 सपा
-------------
2017 के चुनाव में मनोज पारस को मिले थे 77 हजार वोट
2017 के चुनाव में सपा के पूर्व मंत्री व विधायक मनोज पारस लगातार दूसरी बार जीते थे। उन्होंने भाजपा से चुनाव लड़ी पूर्व मंत्री ओमवती को हराया था। मनोज पारस को 77 हजार 145 और भाजपा से ओमवती को 69 हजार 178 वोट मिले थे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें