बिजनौर में बसपा की तर्ज पर सपा ने भी विधानसभा चुनाव के लिए अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। जिले की पांच विधानसभा सीटों पर प्रत्याशी घोषित किए हैं। इन सीटों पर सपा ने अपने दिग्गजों पर दांव लगाया है। जिन सीटों पर प्रत्याशी घोषित किए हैं, उनमे किसी पर भी सपा का कब्जा नहीं है।
अब तक बसपा ही चुनाव से साल भर पहले अपने प्रत्याशी घोषित करती आई है। टिकट घोषित करने के मामले में अब सपा भी बसपा की राह पर चल पड़ी है। सपा ने अपनी जो पहली सूची जारी की है, उसमें बिजनौर जनपद की नजीबाबाद सीट से पूर्व ब्लॉक प्रमुख अबरार आलम अंसारी, बढ़ापुर से अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व चेयरमैन शेख सुलेमान उर्फ पप्पू, नहटौर सुरक्षित सीट से पूर्व सांसद स्व.मंगलराम प्रेमी के पुत्र मुन्नालाल प्रेमी, चांदपुर सीट से चेयरपर्सन पति शेरबाज पठान व नूरपुर सीट से श्रम विभाग के सलाहकार नईमुल हसन पर दांव खेला है। चांदपुर सीट से पूर्व सांसद देवेंद्र नागपाल, नूरपुर सीट से सपा नेता और बछरायूं के चेयरमैन अफसर अली अंसारी, रफी सैफी, नजीबाबाद सीट से पूर्व जिलाध्यक्ष जमील अहमद अंसारी भी टिकट मांग रहे थे। पर उनके नाम पहली सूची में नहीं आए हैं। इन सीटों पर सपा का कब्जा नहीं है। इन सीटों पर पार्टी को मजबूत करने के लिए पार्टी हाईकमान ने प्रत्याशी घोषित किए हैं। पार्टी ने जल्दी प्रत्याशी घोषित कर बसपा का रास्ता पकड़ा है किंतु जनपद में सपा की राह सरल नहीं है। पार्टी में गुट बंदी बुरी तरह हाबी है। एक खेमे का प्रतिनिधित्व बिजनौर की एमएलए रूचिवीरा और उनके पति उदयन वीरा करते हैं। इसमें पूर्व सांसद यशवीर धोबी,नगीना के पालिका चेयरमैन खलीलुररहमान पूर्व जिलाध्यक्ष जमील अहमद कई नेता हैं। दूसरे खेमें में राज्यमंत्री मूलचंद चौहान, विधायक मनोज पारस और जिलाध्यक्ष अनिल यादव प्रमुख है। प्रत्याशियों की घोषणा से सपा के दिग्गजों में खलबली है। टिकट चाहने वालों में आकाओं के पास दौड़ लगा दी है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक पार्टी हाईकमान की ओर से जो टिकट घोषित किए गए हैं, उनमे जल्दी ही फेरबदल होने की संभावना है।