बिजनौर में सेंट्रल ऑफ ट्रेड यूनियन के तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस पर आयोजित गोष्ठी में मजदूर वर्ग पर रहे हमले व उत्पीड़न के विरुद्ध एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान किया।
गोष्ठी में पत्रकार डा. सूर्यमणि रघुवंशी ने कहा कि देश में मजदूरों का सबसे ज्यादा शोषण व अहित हो रहा है। देश के एक बहुत बड़े वर्गों की नीतियां, सोच में मजदूर वर्ग के लिए कुछ नहीं है, लेकिन देश के मजदूरों का दुर्भाग्य है कि सरकारों के पास उन्हें देने के लिए कुछ नहीं है। मुख्य वक्ता माकपा नेता रामपाल सिंह ने मई दिवस के इतिहास पर प्रकाश डाला। कहा कि संयुक्त संघर्षों के बाद ही मेहनतकश को उनका अधिकार मिल सकता है। कहा कि मजदूरों के सामने भूख की बेड़ियां है। शोषित वर्ग का और अधिक शोषण हो रहा है। शोषित वर्ग को संगठित होकर अपने अधिकारों के प्रति संघर्ष करना होगा। राजेंद्र राजपूत, मुनव्वर जमील, पुखराज सिंह मलिक, बिजेंद्र सिन्हा, घसीटा सिंह आदि ने विचार रखे।
मिठाइयां बांटी गईं
नजीबाबाद में मजदूर दिवस पर लायनेस क्लब की ओर से मजदूरों को मिष्ठान वितरित किया गया। महिलाओं ने मजदूरों सरकार की विभिन्न योजनाओं के प्रति जागरूक रहकर समय-समय पर लाभान्वित होने की सलाह दी।रविवार को मजदूर दिवस पर लायनेस क्लब अध्यक्ष डॉ. राखी अग्रवाल के नेतृत्व में क्लब से जुड़ीं समाजसेवी महिलाओं ने श्रमिकों के बीच पहुंचकर उन्हें प्रोत्साहित किया। डॉ. राखी अग्रवाल ने श्रमिकों को सरकार की विभिन्न योजनाओं से अवगत कराया। इस मौके पर सचिव चारु गुप्ता, डॉ. मधु, अनुराधा आदि महिलाएं उपस्थित रहीं।
मिठाइयां बांटी गईं
नजीबाबाद। मजदूर दिवस पर लायनेस क्लब की ओर से मजदूरों को मिष्ठान वितरित किया गया। महिलाओं ने मजदूरों सरकार की विभिन्न योजनाओं के प्रति जागरूक रहकर समय-समय पर लाभान्वित होने की सलाह दी।रविवार को मजदूर दिवस पर लायनेस क्लब अध्यक्ष डॉ. राखी अग्रवाल के नेतृत्व में क्लब से जुड़ीं समाजसेवी महिलाओं ने श्रमिकों के बीच पहुंचकर उन्हें प्रोत्साहित किया। डॉ. राखी अग्रवाल ने श्रमिकों को सरकार की विभिन्न योजनाओं से अवगत कराया। इस मौके पर सचिव चारु गुप्ता, डॉ. मधु, अनुराधा आदि महिलाएं उपस्थित रहीं।
श्रद्धांजलि दी
बिजनौर। आरजेपी इंटर कॉलेज में श्रमिक दिवस पर आयोजित गोष्ठी में कॉलेज प्रधानाचार्य डा. राजकुमार त्यागी ने कहा कि आज समाज में उन्नत वर्ग की तरह प्रतिष्ठित जीवन व्यतीत करने वाला संपूर्ण कर्मचारी व श्रमिक वर्ग उन महान विभूतियों का ऋणी है, जिन्होंने 11 नवंबर 1889 को फांसी पर चढ़कर अपने प्राणों की आहुति दे दी।