130 करोड़ का रोजगार देते हैं लघु उद्योग
बिजनौर। लघु उद्योग जिले में परिवारों को रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं। खेती से अलग इन लघु उद्योगों ने जिलेवासियों को रोजगार व आमदनी के नए विकल्प दिए हैं। लेकिन लॉकडाउन के बाद उत्पन्न परिस्थितियों की वजह से इन उद्योगों से जुड़े उद्यमियों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है।
उद्योगों को चार श्रेणी सूक्ष्म, लघु, मध्यम व बड़े उद्योगों में बांटा जाता है। केंद्र सरकार ने सूक्ष्म उद्योगों की नई परिभाषा तय की है। पांच करोड़ तक की पूंजी वाले उद्योग अब सूक्ष्म उद्योगों में आते हैं। जिले में काष्ठकला, ब्रश, प्लाइवुड, क्रेशर, ईंट भट्टे आदि उद्योगों में उद्यमियों ने काफी पूंजी लगा रखी है। क्रेशर और ईंट भट्टा उद्योग तो सीधे जनता से जुड़े हुए हैं। जिले में अब तक 78 क्रेशर संचालित थे। इस बार 30 और उद्योगपतियों ने क्रेशरों के लाइसेंस के लिए आवेदन किया है। जिले की नगीना का काष्ठकला उद्योग तो यूरोप तक में प्रसिद्ध है। शेरकोट में बना ब्रश भी देश भर में भेजा जाता है। जिले की प्लाइवुड इंडस्ट्री इस साल पहली बार अपना माल बाहर भेजने के लिए प्रयास कर रही थी लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। जो भी हो लघु उद्योगों में रोजगार हासिल करना आम आदमी की जद में होता है। लॉकडाउन में भी इन उद्योगों ने मजदूरों और कारीगरों को रोजगार दिया है। जिले के लगभग हर क्षेत्र में स्थापित ये उद्योग जिले की अर्थव्यवस्था को और मजबूत करने में लगे हैं। इनसे करीब सवा पांच हजार परिवारों को रोजगार मिल रहा है।
जिले के उद्योग इकाई रोजगार टर्नओवर
सूक्ष्म 3558 16878 500
लघु 280 5297 130
मध्यम 13 620 70
बड़े 20 22000 4000
नोट : ये आंकड़े जिला उद्योग केंद्र से लिए गए हैं।
उद्योगों को बचाने में मदद दे सरकार
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के मुरादाबाद डिवीजन सेक्रेट्री अभिषेक गोयल का कहना है कि उद्योगों से हजारों परिवारों को रोजगार मिलता है। सरकार को उद्योगों को राहत देने के लिए सरकार को बिजली बिलों आदि में बहुत छूट देनी चाहिए। अब उद्योग चलाने के लिए नहीं उद्यमी उद्योग बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।