फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

लिखित मांग पर मौखिक आश्वासन, नहीं मिल रही ऑक्सीजन

विज्ञापन
विज्ञापन
सांसों का संकट: लिखित मांग पर केवल आश्वासन
विज्ञापन

बिजनौर। जिले के निजी अस्पताल संचालकों को काफी प्रयास करने के बाद भी ऑक्सीजन की उपलब्धता नहीं हो पा रही है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की ओर से कई बार लिखित और मौखिक रूप से जिला प्रशासन को सूचना देने के बाद भी ऑक्सीजन की सप्लाई नहीं हो पा रही है, जिससे विभिन्न गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों की जान पर बन आई है। एसोसिएशन के पदाधिकारियों का आरोप है कि जिला प्रशासन द्वारा उन्हें आश्वासन देकर टरकाया जा रहा है। बार-बार फोन करने पर भी अधिकारी उनका नंबर रिसीव नहीं करते, जिससे निजी चिकित्सकों में रोष व्याप्त है।
देश भर के साथ साथ जिले भर में लगभग एक महीने से ऑक्सीजन का आपातकाल सा हो गया है। वर्तमान में हालात ऐसे हो गए हैं कि निजी अस्पताल संचालकों को काफी प्रयासों के बाद भी ऑक्सीजन मयस्सर नहीं हो रही है। आईएमए से जुड़े चिकित्सकों के अनुसार सामान्य दिनों में निजी अस्पतालों को प्रतिदिन 200 सिलिंडर ऑक्सीजन की आपूर्ति मुजफ्फरनगर की एक प्राइवेट फर्म द्वारा की जाती है, लेकिन वहां के जिला प्रशासन ने ऑक्सीजन के सारे गोदाम अपने कब्जे में लेते हुए अन्य जिलों को सप्लाई देने से स्पष्ट रूप से इंकार कर दिया है। इस कारण करीब एक माह से निजी अस्पतालों में ऑक्सीजन का भारी टोटा चल रहा है, जिसके चलते निजी अस्पताल गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को उनके हाल पर ही छोड़ने को मजबूर होना पड़ रहा है। मरीज ऑक्सीजन के अभाव में दम तोड़ रहे हैं। इसके बावजूद जिला प्रशासन इसे गंभीरता से नहीं ले रहा है।
विज्ञापन

आईएमए अध्यक्ष डॉ. सुभाष राणा का कहना है कि डीएम रमाकांत पांडेय से वार्ता करने पर डीएम ने जिले में ऑक्सीजन की सप्लाई के संबंध में तीन सदस्यों की कमेटी बनाई थी। इसमें सीएमओ डॉ. विजय कुमार यादव, डीआई आशुतोष मिश्रा, आईएमए अध्यक्ष डॉ. सुभाष राणा को शामिल किया गया था। डीएम स्वयं इसके अध्यक्ष हैं। इसका मकसद ये था कि समय पर बैठक होती रहे, लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है। करीब 15 दिन बीतने को हैं मगर अभी तक एक बार भी बैठक नहीं हुई।
डॉ. सुभाष राणा का आरोप है कि बार-बार फोन करने पर भी अधिकारी उनका अथवा आईएमए के अन्य पदाधिकारियों का फोन रिसीव करना भी उचित नहीं समझते। इस कारण निजी चिकित्सकों को काफी परेशानी होती थी। इस आपातकाल में सिर्फ एक बार निजी चिकित्सकों के लिए बीएचईएल हरिद्वार से ऑक्सीजन जरूर आई थी। दोबारा में उत्तराखंड सरकार ने रोक लगा दी।
चार दिन से लोड खड़ी है गाड़ी
आईएमए पदाधिकारियों का कहना है कि जिला प्रशासन पर बार-बार दबाव बनाने पर प्रत्येक निजी चिकित्सक के यहां से चार-चार सिलिंडर मंगवाकर गाड़ी लोड करा दी गई थी। जिला प्रशासन ने निजी चिकित्सकों की मांग पर प्रतिदिन 100 सिलिंडर की सप्लाई करने की बात कही थी, जो अभी तक भी पूरी नहीं हो पाई। उन्होंने शीघ्र ही प्रतिदिन कम से कम 100 सिलिंडर निजी चिकित्सकों को उपलब्ध कराने की मांग की है।
मांग के बाद भी प्लांटों से नहीं मिल रही सप्लाई
धामपुर। धामपुर में ऑक्सीजन गैस का पिछले कई महीने से टोटा है। ऑक्सीजन की कमी के कारण बीमार लोग मरने को विवश हो रहे हैं। सरकारी और गैर सरकारी डाक्टरों के यहां भी ऑक्सीजन नहीं है। नगर की दो गैस डिपो के प्रबंधकों ने तो कई दिन से हाथ खड़े कर रखे हैं। इनका आरोप है कि जब ऑक्सीजन मांग के बाद भी प्लांट से नहीं मिल रही है तो वे ऐसे में क्या करें।
विज्ञापन

धामपुर में तीन ऑक्सीजन डिपो है। इनमें से दो डिपो के प्रबंधकों ने तो हाथ खड़े कर दिए हैं। प्रबंधक का कहना है कि जब मांग के बाद भी प्लांट से माल नहीं आ रहा है तो वे ऐसे में क्या करें। जो उपलब्धता उनके पास जमा थी। वह उन्होंने जरूरतमंदों में बांट दी। कई बार प्रदेश के परिवहन मंत्री अशोक कटारिया व अन्य जनप्रतिनिधियों से हस्तक्षेप कर व्यवस्था में सुधार की मांग की, लेकिन अभी तक कुछ भी सुधार होता नजर नहीं आ रहा है। रेलवे स्टेशन स्थित अग्रवाल गैस डिपो के प्रबंधक अंकित अग्रवाल का कहना है कि शनिवार को उनकी यहां सप्लाई आनी थी, नहीं आई। भाजपा नगर मंडल के अध्यक्ष राघव शरण गोयल का कहना है कि उनके स्तर से पूरा प्रयास किया जा रहा है। परिवहन मंत्री से हस्तक्षेप कर व्यवस्था में सुधार का आग्रह किया गया है। राघव शरण गोयल ने बताया कि गोयल डिपो का प्रबंधक और उनके परिवार के सदस्य कोरोना संक्रमण के कारण होम आइसोलेट हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें