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पूरी रेकी के साथ दिया घटना को अंजाम

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जजी में रेकी कर अंजाम दी गई वारदात
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बिजनौर। जजी परिसर के सीजेएम कोर्ट में हिस्ट्रीशीटर शाहनवाज की हत्या बड़े सोच समझकर की गई। वारदात को अंजाम देने से पहले रेकी की गई। कचहरी में घूमकर पता कर लिया गया था कि कहां कहां पर पुलिस तैनात रहती है और कहां पर चेकिंग होती है। किस समय पर वारदात करनी है और कैसे पिस्टल ले जानी हैं, यह सब पहले से तय कर लिया गया था। उसी के तहत वारदात को अंजाम दिया गया।
सीजेएम न्यायालय में 12 बजे तक जमानत के प्रार्थना पत्र लगते हैं। साढेे़ 12 बजे से डेढ़ बजे तक सुनवाई होती है। इस दौरान कोर्ट में काफी भीड़ और गहमागहमी रहती है। डेेेेढ़ बजे के बाद बहुत कम लोग कोर्ट में रह जाते है। डेढ़ बजे कोर्ट भी भोजनावकाश को उठ जाती है। हत्यारों को इस सबकी जानकारी थी। स्पष्ट होता है कि कई दिन से कचहरी में रैकी की की गई। उन्हें कोर्ट की प्रक्रिया की पूरी जानकारी थी। इसीलिए एक बजकर 40 मिनट पर वारदात को अंजाम दिया गया।
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जजी में मौजूद कई सीनियर वकील ने बताया कि हमलावर चाहते तो दिल्ली पुलिस की गाड़ी में या शाहनवाज को कोर्ट लाते हमला कर सकते थे। किंतु रास्ते में मुठभेड़ में मारे जाने की आशंका थी। कोर्ट रूम में भीड़ कम थी। कोर्ट के अंदर फोर्स भी नहीं होती। वहां जो पुलिस कर्मी होते हैं, उन पर शस्त्र नहीं होते। ऐसे में हमलावरों को मुठभेड़ का खतरा नहीं था। इसीलिए कोर्ट में ही वारदात करना तय किया। उधर, जजी में सीजेएम कोर्ट के बाहर कई वकीलों से बात की गई। सबका यही कहना था कि कोर्ट में गोली चलते ही भगदड़ मच गई थी। हरेक व्यक्ति अपनी जान बचाने के लिए भागने लगा। एक अधिवक्ता ने बताया कि कोर्ट के बरामदे में मौजूद एक पुलिस कर्मी की कारबाइन नीचे गिर गई। वह कारबाइन संभाल कर भाग लिया। जिसको जहां अवसर मिला, वहीं छिप गया। किसी ने मेज के नीचे शरण ली तो किसी ने कुर्सी के नीचे। जजी परिसर में दिन भर मंगलवार को हुई वारदात पर ही चर्चा होती रही। कोर्ट में खड़े वकील फर्श में बने निशान दिखा रहे थे और एक दूसरे से कह रहे थे कि यह निशान शाहनवाज को लगी गोली के हैं।
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